हिमालय प्रहरी

बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग को लेकर क्रमिक अनशन 11वें दिन भी जारी; उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

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लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने, गौला नदी के भारी भू-कटाव से बचाव के लिए स्थायी तटबंध का निर्माण कराने और क्षेत्र की 10 सूत्रीय बुनियादी मांगों के त्वरित समाधान को लेकर जनांदोलन लगातार जोर पकड़ता जा रहा है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी एवं भाकपा (माले) तथा ‘इंडिया गठबंधन’ के तत्वावधान में चल रहा क्रमिक अनशन रविवार को 11वें दिन भी पूरी दृढ़ता के साथ जारी रहा।
अनशन के 11वें दिन सामाजिक कार्यकर्ता मोहन कुड़ाई, कांग्रेस नेता पुष्कर दानू, भगवान धामी, मदन फर्स्वाण, रणजीत मेहरा और मंतोष राय ने मंच पर बैठकर अनशन में सहभागिता की।

‘दशकों से छली जा रही जनता, सब्र का इम्तिहान न ले सरकार’

अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता मोहन कुड़ाई ने सरकार की नीतियों पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि बिंदुखत्ता के हजारों परिवार दशकों से अपने मौलिक और कानूनी मालिकाना हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर चुनाव में राजनीतिक दल जनता को राजस्व गांव बनाने का झुनझुना थमा देते हैं, लेकिन सत्ता में आते ही इस संवेदनशील मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अब बिंदुखत्ता की जनता पूरी तरह जागरूक हो चुकी है और जब तक क्षेत्र को राजस्व गांव का विधिक दर्जा तथा भूमि का मालिकाना हक नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है।

गौला नदी के कटाव से वजूद पर खतरा; आमरण अनशन की चेतावनी

कांग्रेसी नेता पुष्कर दानू ने क्षेत्र में गौला नदी से हो रहे कटाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हर साल मानसून के दौरान गौला नदी का उफान बिंदुखत्ता के अस्तित्व को निगलने का प्रयास करता है। किसानों की उपजाऊ जमीनें और मकान नदी में समा रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्थायी सुरक्षा दीवार या तटबंध नहीं बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही स्थायी तटबंध निर्माण और क्षेत्र की 10 सूत्रीय मांगों पर लिखित शासनादेश (GO) जारी नहीं किया, तो इस क्रमिक अनशन को आमरण अनशन और उग्र चक्का जाम में बदल दिया जाएगा।

धरातल पर ठोस कार्रवाई के बाद ही खत्म होगा आंदोलन

गठबंधन के अन्य वक्ताओं ने भी दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि यह आंदोलन अब केवल प्रशासनिक आश्वासनों से समाप्त नहीं होगा। जब तक धरातल पर ठोस और विधिक कार्रवाई शुरू नहीं हो जाती, तब तक अनशनकारी पीछे नहीं हटेंगे। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, पूर्व सैनिक, विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय महिलाएं अनशनकारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए धरना स्थल पर डटे रहे।
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