‘उत्तराखंड कुमाऊँ उत्थान यात्रा’ को मिला ऐतिहासिक जनसमर्थन; भुवन पहाड़ी ने लालकुआं में जारी किया उक्रांद का 10 सूत्रीय नीति-संकल्प पत्र

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लालकुआँ/हल्द्वानी। उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) की ओर से आयोजित ‘उत्तराखंड कुमाऊँ उत्थान यात्रा’ को क्षेत्र की जनता का अभूतपूर्व और ऐतिहासिक समर्थन मिल रहा है। विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के तहत कुमाऊँ मंडल में निकाली जा रही इस यात्रा के माध्यम से दल के पदाधिकारी और कार्यकर्ता लगातार जनता से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं।
यात्रा के दौरान मिले अपार जनसमर्थन और स्नेह से गदगद उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय संगठन मंत्री भुवन सिंह बिष्ट ‘भुवन पहाड़ी’ ने लालकुआं वह समस्त क्षेत्र की समस्त देवतुल्य जनता का हृदय की गहराइयों से आभार व्यक्त किया है।
प्रेस को जारी बयान में उक्रांद नेता भुवन पहाड़ी ने कहा कि इस यात्रा में जनता का स्वतः स्फूर्त शामिल होना और अपना अमूल्य समय देना इस बात का प्रमाण है कि पहाड़ की जनता आज भी क्षेत्रीय अस्मिता और मूल मुद्दों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा, “जनता का यही सहयोग, अटूट विश्वास और असीम स्नेह ही हमारी सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणास्रोत है। यात्रा में देवतुल्य जनता की यह भागीदारी हमारे लिए गर्व और सौभाग्य की बात है।” 
भुवन पहाड़ी ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनके द्वारा दिया गया यह सम्मान और विश्वास व्यर्थ नहीं जाएगा। उत्तराखंड क्रांति दल हमेशा पहाड़, पहाड़ी और उत्तराखंडियत की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध है और जनता के अधिकारों की लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती से लड़ा जाएगा। उन्होंने अपने संदेश के अंत में “जय पहाड़, जय पहाड़ी, जय उत्तराखंड” का नारा बुलंद करते हुए एक बार फिर सभी क्षेत्रवासियों का सहृदय धन्यवाद ज्ञापित किया।
इसी के साथ उन्होंने उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास, स्वाभिमान और सम्मान के लिए उत्तराखंड क्रांति दल का आधिकारिक “10 सूत्रीय नीति-संकल्प पत्र” भी सार्वजनिक किया है, जो दल की भावी नीतियों का मुख्य आधार है।
उक्रांद के 10-सूत्रीय नीति-संकल्प पत्र की मुख्य बातें:
  1. अनुच्छेद 371 के तहत संवैधानिक सुरक्षा: उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों, संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए विशेष संवैधानिक कवच की मांग।
  2. मूल निवास-1950 की बहाली: वर्ष 1950 के आधार पर मूल निवासियों की पहचान सुनिश्चित करना और जल-जंगल-जमीन, नौकरियों व व्यापार में उन्हें प्राथमिकता देना।
  3. सशक्त भू-कानून: उत्तराखंड की परिस्थितियों के अनुरूप नया, सख्त और प्रभावी भू-कानून लागू कर जमीनों की अंधाधुंध खरीद-फरोख्त पर रोक लगाना।
  4. पलायन-मुक्त पहाड़: “रोजगार वहीं, जीवन यहीं” के संकल्प के साथ हर गाँव तक सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार पहुंचाकर पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोकना।
  5. आरक्षण के भीतर आरक्षण: समाज के अंतिम छोर पर बैठे सबसे गरीब, वंचित और आर्थिक रूप से पिछड़े SC/ST परिवारों तक 50% आरक्षण का लाभ पहुंचाना।
  6. शिक्षा में व्यापक सुधार: हर ग्राम/नगर पंचायत में आधुनिक ‘मॉडल स्कूल’ खोलना, निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर नकेल और उच्च शिक्षा में तकनीकी व चिकित्सा संस्थानों का अनिवार्य पंजीकरण।
  7. 24×7 स्वास्थ्य सेवा: हर गाँव-कस्बे में चौबीसों घंटे स्वास्थ्य सुविधाएं, हर ब्लॉक में 100-बिस्तरों का अस्पताल और प्रत्येक जिले में 500-बिस्तरों वाला सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करना।
  8. कृषि एवं बागवानी का संरक्षण: उजड़ती खेती को बचाने के लिए पर्वतीय कृषि को आर्थिक प्रोत्साहन, विपणन (मार्केटिंग), कोल्ड स्टोरेज का विस्तार और जंगली जानवरों से फसल नुकसान का उचित मुआवजा।
  9. भय एवं भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन: भ्रष्टाचार के खिलाफ Zero Tolerance नीति, फर्जी प्रमाणपत्रों और पेपर लीक माफिया पर सख्त कार्रवाई तथा अधिकारियों की संपत्ति की वार्षिक घोषणा।
  10. सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा कवच (तीन प्रमुख योजनाएं):
    • उदय योजना: पात्र बेरोजगारों के लिए गारंटीशुदा न्यूनतम मासिक आय और वित्तीय सुरक्षा।
    • उद्गम योजना: हर गाँव को पक्की सड़क से जोड़ना और कृषि, बागवानी, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को वित्तीय सहायता।
    • उम्मीद योजना: सीमावर्ती व सुदूर क्षेत्रों के निवासियों के लिए स्थानीय, सार्थक और सम्मानजनक रोजगार सुनिश्चित करने का कानूनी ढांचा।
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यात्रा के दौरान उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती, पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल समेत उत्तराखंड क्रांति दल के कई वरिष्ठ नेता, स्थानीय पदाधिकारी, समर्पित कार्यकर्ता और भारी संख्या में क्षेत्रीय मातृशक्ति व युवा उपस्थित रहे।

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