
राजू अनेजा,लालकुआं। कभी वीआईपी सीट मानी जाने वाली लालकुआं विधानसभा सीट पर इस बार सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। भाजपा के दो कार्यकाल पूरे होने के बाद अब क्षेत्र में जनता की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर यही हालात रहे तो इस बार कमल की जड़ों तक पहुंच चुकी नाराजगी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
जनता के सवालों के घेरे में भाजपा
क्षेत्र में लंबे समय से कई महत्वपूर्ण मुद्दे अधूरे पड़े हैं, जिनको लेकर जनता लगातार सवाल उठा रही है। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने का मामला हो, लालकुआं में इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज की मांग हो, बस अड्डा, ग्रीन पार्क, लालकुआं बाईपास और अस्पताल के उच्चीकरण जैसे मुद्दे—इन सभी पर अपेक्षित प्रगति न होने से लोगों में असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि भाजपा को इन सवालों का सामना करना पड़ रहा है।
भाजपा के 9 साल बनाम विकास की बहस
भाजपा ने पिछले करीब नौ वर्षों में क्षेत्र के विकास के कई दावे किए, लेकिन विपक्ष और स्थानीय लोग इन दावों को जमीन पर अधूरा बता रहे हैं। कांग्रेस इसी मुद्दे को लेकर भाजपा को घेरने में जुटी है और जनता के बीच यह सवाल उठा रही है कि इतने लंबे समय के बावजूद क्षेत्र को वह विकास क्यों नहीं मिल पाया जिसकी उम्मीद की जा रही थी।
अंदरूनी सर्वे में बढ़ी चिंता
सूत्रों के मुताबिक भाजपा के अंदरूनी सर्वे में भी इस बार एंटी इनकंबेंसी के संकेत मिले हैं। यही वजह है कि पार्टी संगठन स्तर पर भी लगातार फीडबैक लिया जा रहा है। हालांकि भाजपा नेता इन चर्चाओं को खारिज करते हुए दावा कर रहे हैं कि सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों के दम पर जनता एक बार फिर कमल को ही समर्थन देगी।
निर्णायक भूमिका में बिंदुखत्ता
लालकुआं विधानसभा सीट में बिंदुखत्ता क्षेत्र हमेशा से चुनावी गणित का अहम केंद्र रहा है। यहां बड़ी आबादी होने के कारण चुनावी परिणामों पर इसका सीधा असर पड़ता है। लंबे समय से राजस्व गांव का दर्जा न मिलने से यहां के लोगों में नाराजगी की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में तेज है। जानकारों का मानना है कि यदि यह नाराजगी चुनाव तक बनी रही तो इसका सीधा असर भाजपा के वोट बैंक पर पड़ सकता है।
लालकुआं का सियासी इतिहास भी दिलचस्प
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार लालकुआं सीट का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद बनी इस सीट पर 2012 में निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल कर सभी को चौंका दिया था। बाद के चुनावों में भाजपा ने यहां कब्जा जमाया, लेकिन क्षेत्र की जनता का मिजाज हमेशा से अलग रहा है। स्थानीय लोग अक्सर पार्टी से ज्यादा उम्मीदवार और मुद्दों के आधार पर मतदान करते रहे हैं।
चौंकाने वाले हो सकते हैं हालात
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यदि चुनाव तक यही माहौल बना रहा तो लालकुआं सीट पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है। कांग्रेस भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने में जुटी है, वहीं निर्दलीय विकल्प की भी चर्चा शुरू हो गई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार लालकुआं की जनता कमल पर भरोसा दोहराती है या फिर कोई नया सियासी इतिहास रचती है।
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें