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बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग तेज: वनाधिकार समिति ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, अधिसूचना जल्द जारी करने की अपील

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लालकुआं। वनाधिकार समिति बिंदुखत्ता ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन प्रेषित कर बिंदुखत्ता को ‘वनाधिकार अधिनियम, 2006’ के तहत तत्काल राजस्व ग्राम घोषित करने की अधिसूचना जारी करने की पुरजोर मांग की है। ज्ञापन में बताया गया है कि बिंदुखत्ता के 32 वन ग्रामों के 11,703 परिवारों का सामुदायिक दावा जिला स्तरीय वनाधिकार समिति द्वारा 19 जून 2024 को सर्वसम्मति से स्वीकृत कर शासन को भेजा जा चुका है, लेकिन दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अधिसूचना जारी नहीं हो सकी है।

ज्ञापन में समिति ने राज्य सरकार द्वारा इस मामले को पुनः केंद्र सरकार को भेजने की तैयारी पर गंभीर आपत्ति जताई है। समिति का तर्क है कि वनाधिकार अधिनियम, 2006 के तहत राजस्व ग्राम घोषित करने का पूरा अधिकार जिला स्तरीय समिति और राज्य सरकार के पास सुरक्षित है। इसके लिए न तो वन भूमि के अनारक्षण की आवश्यकता है और न ही केंद्र सरकार या सर्वोच्च न्यायालय से किसी अनुमति की। समिति ने याद दिलाया कि वर्ष 2011 और 2024 में स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की सार्वजनिक घोषणाएं की जा चुकी हैं, ऐसे में अब दोबारा केंद्र को प्रस्ताव भेजना पूर्व के निर्णयों और कानून की भावना के विपरीत है।

इसके अतिरिक्त, नैनीताल उच्च न्यायालय में लंबित प्रकरण का हवाला देते हुए समिति ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को इस आधार पर अधिसूचना रोकने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह एक विशेष कानून है और इसकी धारा 4(7) के तहत वन भूमि के अनारक्षण की कोई अनिवार्यता नहीं है। समिति ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जिला स्तरीय समिति के निर्णय के आधार पर जल्द से जल्द अधिसूचना जारी की जाए ताकि हजारों परिवारों को उनका हक मिल सके।

ज्ञापन सौंपने के दौरान वनाधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट, सचिव एडवोकेट बलवंत सिंह बिष्ट, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू, कैप्टेन चंचल सिंह कोरंगा, कैप्टेन दलवीर सिंह कफोला, डॉ चंद्र सिंह दानू, भगत सिंह बिष्ट, रंजीत सिंह गड़िया, दीपक नेगी, भूपेश जोशी, नवीन जोशी, ममता बिष्ट, रेखा परिहार, वेदिका, कविता देवी, हेमा रावत, दीपक रौतेला, एडवोकेट भगवान सिंह माजिला, माधो सिंह अरमोली, कुंदन सिंह, दौलत सिंह कोरंगा, करम सिंह कोरंगा, खड़क सिंह, नैन सिंह पांडा, नंदन सिंह गड़िया और शंकर सिंह चुफाल सहित कई लोग उपस्थित रहे।

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