देहरादून | 17 फरवरी, 2026: उत्तराखंड में वर्षों से लंबित शत्रु संपत्तियों (Enemy Properties) को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद प्रदेश की सभी 34 चिन्हित संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने और उनके जनहित में उपयोग की फाइलें दोबारा खोल दी गई हैं।
📊 उत्तराखंड में शत्रु संपत्तियों का लेखा-जोखा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अरबों रुपये की भूमि शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज है, जिन पर भू-माफियाओं की नजर है:
| स्थान | संपत्ति का विवरण | वर्तमान स्थिति |
| देहरादून (टर्नर रोड) | करीब 70 बीघा भूमि | चिन्हित, कब्जे की जांच जारी। |
| देहरादून (माजरा) | लगभग 1800 बीघा जमीन | अरबों की कीमत, दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। |
| नैनीताल | मेट्रोपोल परिसर आदि | खाली कराई जा चुकी है (पार्किंग हेतु प्रस्तावित)। |
| ऊधम सिंह नगर | किच्छा क्षेत्र की संपत्तियां | जिला प्रशासन के रडार पर। |
| हर हरिद्वार | विभिन्न भूखंड | सहारनपुर से मूल अभिलेख मंगाए गए हैं। |
📜 क्या होती है शत्रु संपत्ति?
यह वे संपत्तियां हैं जिनके मालिक 1947 विभाजन के समय पाकिस्तान चले गए या 1962 के युद्ध के बाद चीन जाकर वहां की नागरिकता ले ली। ‘शत्रु संपत्ति अधिनियम’ के तहत इन पर केंद्र सरकार का नियंत्रण होता है और इन्हें किसी निजी व्यक्ति को बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।
🔍 फर्जीवाड़े का ‘सहारनपुर कनेक्शन’
जांच में यह बात सामने आई है कि उत्तराखंड गठन के बाद भी देहरादून और हरिद्वार के पुराने राजस्व रिकॉर्ड सहारनपुर कमिश्नरी में थे। भू-माफियाओं ने कथित तौर पर इन्हीं पुराने दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर फर्जी मालिकाना हक तैयार किया। अब जिला प्रशासन मूल अभिलेखों के आधार पर इन संपत्तियों का सत्यापन कर रहा है।
🎙️ मुख्यमंत्री का संकल्प
“प्रदेश में जितनी भी शत्रु संपत्तियों की सूचना केंद्र से मिली है, उनकी पहचान पूरी हो चुकी है। नैनीताल की तरह ही राज्य की अन्य सभी शत्रु संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाएगा। इन जमीनों का उपयोग केवल अस्पताल, पार्किंग या अन्य जनहित के कार्यों के लिए होगा।”
— पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
⚠️ चुनौतियां और सुस्त कार्रवाई
टर्नर रोड और माजरा जैसी प्राइम लोकेशन वाली जमीनों पर कार्रवाई की रफ्तार धीमी होने पर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रभावशाली भू-माफियाओं के दबाव के कारण कुछ फाइलें ठंडे बस्ते में चली गई थीं, जिन्हें अब सीएम के दखल के बाद फिर से सक्रिय किया गया है।
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