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क्या तजुर्बेकार को किनारे करना भाजपा की सबसे बड़ी भूल साबित हुई?

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लालकुआं में फिर गूंजने लगा नवीन दुमका का नाम, जनता के बीच पुराने चेहरे की चर्चा तेज

राजू अनेजा,लालकुआं। विधानसभा चुनाव की आहट से पहले लालकुआं की सियासत में एक बार फिर पुराने और अनुभवी चेहरे की चर्चा तेज हो गई है। भाजपा के सामने जहां लगातार तीसरी बार कमल खिलाने की चुनौती है, वहीं क्षेत्र में यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या पार्टी ने अपने अनुभवी और जमीनी नेता नवीन दुमका को किनारे कर राजनीतिक रूप से बड़ी भूल कर दी? जनता के बीच हो रही चर्चाओं में पूर्व विधायक नवीन दुमका का नाम एक बार फिर प्रमुखता से सामने आने लगा है।

2017 में कांग्रेस के गढ़ में खिलाया था कमल

नवीन दुमका का राजनीतिक सफर लालकुआं की सियासत में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वर्ष 2017 में भाजपा ने उन पर भरोसा जताते हुए चुनाव मैदान में उतारा था। उस समय लालकुआं सीट को कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता था और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरिश्चंद्र दुर्गापाल का क्षेत्र में लंबे समय से प्रभाव था।

दुर्गापाल इससे पहले धारी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके थे और बाद में निर्दलीय चुनाव जीतकर कैबिनेट मंत्री तक बने। ऐसे मजबूत राजनीतिक आधार के बावजूद भाजपा ने संघ के पुराने साथी और अनुभवी संगठनकर्ता नवीन दुमका पर दांव खेला और उन्होंने चुनाव में शानदार जीत दर्ज कर लालकुआं में करीब एक दशक बाद कमल खिलाने का काम किया।

भाजपा के लिए मुश्किल मानी जा रही सीट पर दुमका ने बनाया रास्ता

उस दौर में लालकुआं सीट भाजपा के लिए आसान नहीं मानी जाती थी। संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ जनता के बीच अपनी पकड़ बनाने की चुनौती भी थी। ऐसे समय में पार्टी ने नवीन दुमका के अनुभव और जमीनी संपर्क पर भरोसा किया।

दुमका ने न सिर्फ चुनाव जीता बल्कि भारी मतों से तत्कालीन कद्दावर नेता हरिश्चंद्र दुर्गापाल को शिकस्त देकर यह साबित किया कि मजबूत संगठन, क्षेत्रीय पकड़ और जनता से सीधा संवाद चुनावी समीकरण बदल सकता है।

2022 में बदला चेहरा, भाजपा ने युवा मोहन सिंह बिष्ट पर जताया भरोसा

वर्ष 2022 में भाजपा ने रणनीति बदली और युवा चेहरे के रूप में मोहन सिंह बिष्ट को चुनाव मैदान में उतारा। पार्टी का यह प्रयोग सफल भी रहा और भाजपा ने सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा।

लेकिन अब करीब साढ़े चार साल बाद चुनावी माहौल बनने के साथ ही क्षेत्र में पार्टी के सामने एक नया सवाल खड़ा दिखाई दे रहा है—क्या अगली बार भी मौजूदा चेहरे पर दांव लगाया जाए या फिर पुराने अनुभवी चेहरे को वापस मैदान में उतारा जाए?

“नवीन दुमका आज भी जनता के बीच उपलब्ध”

स्थानीय लोगों के बीच होने वाली चर्चाओं में नवीन दुमका को आज भी भाजपा का जमीनी और आसानी से उपलब्ध नेता बताया जाता है। समर्थकों का कहना है कि दुमका के पास क्षेत्र की समस्याओं को समझने के साथ-साथ अधिकारियों और सरकार तक बात पहुंचाने का लंबा अनुभव है।

कहा जाता है कि उनके आवास पर आज भी क्षेत्र की छोटी-बड़ी समस्याओं को लेकर लोगों का आना-जाना लगा रहता है। समर्थकों के अनुसार, समस्या सड़क की हो या किसी अन्य जनसुविधा की, दुमका जनता के बीच खड़े दिखाई देते हैं और जरूरत पड़ने पर सड़क पर दरी बिछाकर बैठने से भी पीछे नहीं हटते।

“भाजपा का वह बरगद, जिसे खून-पसीने से सींचा”

क्षेत्र में नवीन दुमका को भाजपा का ऐसा “बरगद” भी कहा जाता है, जिसे पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और संगठन ने वर्षों की मेहनत से खड़ा किया है। उनके समर्थकों का मानना है कि दुमका ने भाजपा को केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि लंबे समय तक संगठन और समाज के स्तर पर मजबूत करने का काम किया।

यही वजह है कि चुनाव नजदीक आने के साथ उनके समर्थकों और कुछ स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि पार्टी को अनुभवी चेहरे को एक बार फिर मौका देने पर विचार करना चाहिए।

युवा विधायक से जनता को थीं बड़ी उम्मीदें, अब सवाल भी उठ रहे

2022 में युवा नेतृत्व को लेकर जनता के बीच भी काफी उम्मीदें थीं। लोगों को उम्मीद थी कि युवा सोच और सरकार के साथ मजबूत तालमेल के चलते लालकुआं विधानसभा में वर्षों से लंबित कई मांगों को गति मिलेगी।

राजस्व गांव का सपना, मालिकाना हक, शहर में बस अड्डा, डिग्री कॉलेज, राजकीय इंटर कॉलेज की नई इमारत और युवाओं के लिए रोजगार जैसे मुद्दे चुनाव के समय चर्चा में रहे। लेकिन स्थानीय चर्चाओं में अब इन मांगों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि इनमें से कितने मुद्दे धरातल पर निर्णायक रूप से आगे बढ़ सके।

सोशल मीडिया पर नाराजगी ने बढ़ाई सियासी चर्चा

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर विधायक के खिलाफ दिखाई दी नाराजगी ने भी लालकुआं की सियासत को गर्म कर दिया है। खास बात यह रही कि नाराजगी किसी बड़े राजनीतिक विवाद को लेकर नहीं, बल्कि बिजली, पानी और सड़क जैसी रोजमर्रा की जनसमस्याओं को लेकर सामने आई।

इसी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि आम समस्याओं को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ता है तो इसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति पर पड़ सकता है।

“अगर दुमका होते तो शायद तस्वीर अलग होती”—जनता के बीच चर्चा

क्षेत्र में कुछ लोगों की राय है कि यदि 2022 में नवीन दुमका को ही दोबारा मौका मिलता तो सरकार और संगठन के साथ उनके पुराने तालमेल का लाभ लालकुआं विधानसभा को मिल सकता था। हालांकि यह जनता के बीच चल रही राजनीतिक चर्चा है, लेकिन इससे इतना जरूर साफ है कि पूर्व विधायक दुमका की क्षेत्र में आज भी अपनी अलग पहचान बनी हुई है।

तीसरी बार कमल खिलाने के लिए भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट का फैसला

अब भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती लालकुआं में लगातार तीसरी बार कमल खिलाने की है। ऐसे में टिकट को लेकर होने वाला फैसला सिर्फ एक प्रत्याशी का चयन नहीं बल्कि पार्टी की पूरी चुनावी रणनीति का संकेत माना जाएगा।

क्या भाजपा मौजूदा चेहरे पर भरोसा जारी रखेगी, या फिर 2017 में कांग्रेस के मजबूत गढ़ में कमल खिलाने वाले अपने अनुभवी सिपाही नवीन दुमका को दोबारा मैदान में उतारकर पुराना दांव खेलेगी?

लालकुआं की जनता के बीच फिलहाल यही सवाल चर्चा में है। समर्थकों का कहना है कि इस बार भाजपा को ऐसा उम्मीदवार चाहिए जो सिर्फ चुनाव जीतने वाला नहीं, बल्कि जनता की सुनने वाला और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार तक मजबूती से आवाज उठाने वाला हो।

लालकुआं का चुनाव इस बार सिर्फ चेहरा नहीं, भरोसे का भी इम्तिहान होगा

सियासी समीकरण जिस तेजी से बदल रहे हैं, उसमें भाजपा के लिए प्रत्याशी चयन बेहद अहम होने वाला है। एक तरफ युवा नेतृत्व का अनुभव है तो दूसरी ओर पुराने और अनुभवी चेहरे की मजबूत जमीनी पहचान।

ऐसे में आने वाला चुनाव यह तय करेगा कि लालकुआं की जनता अनुभव, युवा नेतृत्व या किसी नए विकल्प में से किस पर अपना भरोसा जताती है। फिलहाल इतना जरूर है कि नवीन दुमका का नाम फिर चर्चा में आना भाजपा के भीतर टिकट की दौड़ और लालकुआं की चुनावी राजनीति को दिलचस्प बनाने के लिए काफी है।

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