देहरादून (27 अप्रैल 2026): उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की चुनौतियों के बीच बिजली की मांग में भारी उछाल आया है। राज्य के गैस आधारित संयंत्रों में उत्पादन ठप होने और जल विद्युत उत्पादन में गिरावट के कारण पैदा हुए संकट से निपटने के लिए यूपीसीएल (UPCL) ने मोर्चा संभाल लिया है।
ऊर्जा विभाग के सामने खड़ी प्रमुख चुनौतियां
बैठक के दौरान ऊर्जा विभाग ने वर्तमान संकट के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए हैं:
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गैस की कमी: गैस की सीमित उपलब्धता के कारण राज्य के 321 मेगावाट क्षमता वाले गैस आधारित संयंत्रों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
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बढ़ता लोड: वित्तीय वर्ष 2026-27 में बिजली की मांग में 5% की वृद्धि हुई है। साथ ही इंडक्शन कुकर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बढ़ते चलन से 50 से 100 मेगावाट का अतिरिक्त लोड बढ़ा है।
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नदियों का कम जल स्तर: गर्मी के कारण नदियों में पानी कम होने से जल विद्युत परियोजनाओं (Hydel Projects) से उत्पादन घटा है।
केंद्र से मिली बड़ी राहत
राज्य सरकार के प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने उत्तराखंड की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है:
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केंद्रीय ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल ने 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
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अप्रैल, मई और जून के लिए केंद्रीय पूल से पहले ही अतिरिक्त कोटा आवंटित किया जा चुका है।
एडवांस बिजली खरीद और प्रबंधन
UPCL ने बाजार (ऊर्जा एक्सचेंज) से भी एडवांस बिजली खरीद की व्यवस्था कर ली है:
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1 से 15 मई: 100 मेगावाट बिजली की खरीद।
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16 से 31 मई: 225 मेगावाट बिजली सुनिश्चित की गई है।
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रियल-टाइम मॉनिटरिंग: लोड डिस्पैच सेंटर के जरिए पीक डिमांड (Peak Demand) की निगरानी की जा रही है ताकि ग्रिड पर दबाव न बढ़े।
अधिकारियों के सख्त निर्देश और अपील
प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम ने आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को पावर मैनेजमेंट मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक जी एस बुदियाल ने प्रदेशवासियों से एक विशेष अपील की है:
“हम उपभोक्ताओं से 30 अप्रैल तक बिजली बचत में सहयोग करने का अनुरोध करते हैं। हम भरोसा दिलाते हैं कि बेहतर प्रबंधन और अतिरिक्त खरीद के जरिए 1 मई से पूरे प्रदेश में सुचारू और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।”
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