देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व विधायक संगठन ने गुरुवार को सचिवालय में दस्तक दी और मुख्य सचिव आनंद वर्धन से मुलाकात की। इस दौरान पूर्व विधायकों ने अपनी सुविधाओं में की गई कटौती पर गहरी नाराजगी जाहिर की और सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की गुजारिश की। खास बात यह रही कि प्रतिनिधिमंडल में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों से जुड़े पूर्व विधायक शामिल थे।
📉 सुविधाओं में कटौती पर नाराजगी
- मूल आपत्ति: पूर्व विधायकों ने कहा कि सरकार ने बिना किसी ठोस कारण के पहले से मिल रही सुविधाओं में कटौती की है, जो सही नहीं है।
- प्रभावित सुविधाएं: उन्होंने बताया कि उन्हें पहले यात्रा भत्ता, महंगाई भत्ता और आवासीय सुविधाओं में कुछ रियायतें दी जाती थीं, जो अब सीमित कर दी गई हैं।
- पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट (कांग्रेस) का बयान: उन्होंने सरकार के इस कदम को गलत बताते हुए कहा, “पूर्व विधायकों को जो सुविधाएं पहले मिलती रही हैं, उन्हें जारी रखा जाना चाहिए। यह सम्मान और परंपरा दोनों का मामला है।”
- केदार सिंह रावत का खुलासा: उन्होंने बताया कि:
- पहले पूर्व विधायक और सांसदों को सरकारी अतिथि गृहों में आगंतुक सूची में रखा जाता था, जिससे उन्हें आवास में प्राथमिकता मिलती थी, लेकिन अब उन्हें इस सूची से हटा दिया गया है।
- दिल्ली स्थित उत्तराखंड निवास में, जहाँ वर्तमान विधायकों को ठहरने के लिए ₹1,500 देने होते हैं, वहीं पूर्व विधायकों के लिए यह राशि बढ़ाकर ₹3,500 कर दी गई है।
⚖️ “अन्यायपूर्ण” और एकतरफा निर्णय
पूर्व विधायकों ने स्पष्ट किया कि कटौती का यह निर्णय न केवल असंवेदनशील है, बल्कि उन जनप्रतिनिधियों के प्रति भी अन्यायपूर्ण है जिन्होंने वर्षों तक जनता की सेवा की है। उन्होंने कहा कि वे सुविधाओं के दुरुपयोग के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन जिस तरह से एकतरफा तरीके से रियायतों में कटौती की गई है, वह गलत संदेश देती है।
🗣️ अन्य मुद्दे भी उठाए
पूर्व विधायक संगठन ने मुख्य सचिव के सामने राज्य के बेरोजगारों, उपनल कर्मचारियों और किसानों की समस्याओं का मुद्दा भी उठाया और सरकार से इन वर्गों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।
संगठन ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनके अनुरोध पर विचार करते हुए पुराने प्रावधानों को बहाल करेगी।
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें
