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देवभूमि परिवार अधिनियम 2026 को राज्यपाल की मंजूरी: उत्तराखंड में 15 साल से रह रहे नागरिकों को मिलेगी विशेष ‘परिवार आईडी’

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देहरादून, 15 जून 2026: उत्तराखंड में एक राज्य, एक डेटाबेस की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में धामी सरकार को एक बड़ी ऐतिहासिक और विधिक सफलता मिली है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह ने बहुप्रतीक्षित ‘देवभूमि परिवार अधिनियम 2026’ को अपनी आधिकारिक व विधिक मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के साथ ही अब उत्तराखंड में पिछले $15$ वर्षों या उससे अधिक समय से स्थायी रूप से निवास कर रहे परिवारों को एक विशिष्ट ‘देवभूमि परिवार आईडी’ जारी करने का विधिक रास्ता साफ हो गया है। विधानसभा से पारित होने के बाद राजभवन की इस विधिक स्वीकृति को प्रदेश के विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

महिलाएं होंगी परिवार की मुखिया; पासबुक की तरह काम करेगी ऑनलाइन आईडी

इस नए अधिनियम के भीतर महिला सशक्तिकरण को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रगतिशील विधिक प्रावधान किया गया है:

  • महिला मुखिया का विधिक नियम: देवभूमि परिवार आईडी के अंतर्गत परिवार की सबसे अधिक उम्र वाली महिला सदस्य को ही विधिक रूप से परिवार का मुखिया (Head of the Family) स्वीकार किया जाएगा, बशर्ते उनकी आयु $18$ वर्ष से कम न हो। यदि परिवार में कोई वयस्क महिला सदस्य नहीं है, तभी किसी उम्रदराज पुरुष को मुखिया के रूप में विधिक मान्यता दी जाएगी।

  • योजनाओं की डिजिटल पासबुक: यह विशिष्ट आईडी पूरी तरह ऑनलाइन होगी और एक डिजिटल पासबुक की तरह कार्य करेगी। इसमें संबंधित परिवार के विधिक डेटा के साथ इस बात का पूरा विवरण दर्ज होगा कि वह परिवार उत्तराखंड सरकार की किन-किन कल्याणकारी योजनाओं के लिए विधिक रूप से पात्र है, उसने अब तक किन योजनाओं का लाभ उठा लिया है और वर्तमान में कौन सी सरकारी योजनाएं उसके लिए संचालित हैं।

बार-बार डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की बाध्यता होगी खत्म; अपात्रों पर लगेगी रोक

इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के पीछे सरकार का मुख्य विधिक उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है।

  • कागजी कार्रवाई से मुक्ति: इस आईडी के बनने के बाद प्रदेशवासियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) कराने और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की पुरानी जटिल परंपरा से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। एक बार डेटा सत्यापित होने के बाद अन्य सभी विधिक लाभ स्वतः ही ऑनलाइन स्वीकृत हो सकेंगे।

  • भ्रष्टाचार पर विधिक चोट: इस केंद्रीयकृत डेटाबेस (Centralized Database) के माध्यम से शासन के लिए यह ट्रैक करना आसान हो जाएगा कि किस परिवार को लाभ मिल चुका है। इससे एक ही योजना का दो बार लाभ लेने की विधिक गड़बड़ियों और अपात्र लोगों द्वारा धोखाधड़ी से सरकारी धन के दुरुपयोग की संभावनाएं पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।

डेटाबेस से छेड़छाड़ करने पर 10 साल की सख्त जेल और 50 लाख का जुर्माना

नागरिकों की व्यक्तिगत विधिक गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को लेकर भी इस अधिनियम में कड़े दंडात्मक और विधिक प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई भी व्यक्ति, अधिकारी या बाहरी तत्व देवभूमि परिवार डेटाबेस की विधिक सुरक्षा में सेंध लगाने या डेटा के साथ किसी भी प्रकार की अनधिकृत छेड़छाड़ (Cyber Tampering) का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए $10$ वर्ष तक के कठोर कारावास (जेल) और $50$ लाख रुपये तक के भारी आर्थिक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित होगा ‘देवभूमि परिवार प्राधिकरण’

अधिनियम को सुचारू रूप से संचालित और क्रियान्वित करने के लिए एक उच्च स्तरीय ‘देवभूमि परिवार प्राधिकरण’ का विधिक गठन किया जाएगा:

पद नाम नामित अधिकारी/जनप्रतिनिधि
अध्यक्ष मुख्यमंत्री, उत्तराखंड सरकार (पदेन)
उपाध्यक्ष मुख्य सचिव, उत्तराखंड सरकार (पदेन)
विधिक सदस्य सचिव (नियोजन, पंचायती राज, वित्त, न्याय और आईटी विभाग)

यह प्राधिकरण संपूर्ण डेटाबेस की विधिक निगरानी, सुरक्षा और समय-समय पर इसके तकनीकी उन्नयन के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होगा।

उत्तराखंड से बाहर रहने वाले प्रवासियों को नहीं मिलेगा लाभ

इस अधिनियम के विधिक मानकों के अनुसार, यह विशिष्ट परिवार आईडी केवल उन्हीं लोगों के लिए अनिवार्य और वैध होगी जो उत्तराखंड राज्य की भौगोलिक विधिक सीमा के भीतर पिछले $15$ वर्षों या उससे अधिक समय से लगातार निवास कर रहे हैं। वे मूल उत्तराखंडी जो वर्तमान में राज्य की सीमा से बाहर अन्य प्रदेशों या देशों में निवास कर रहे हैं, उन्हें इस अधिनियम के तहत निवासी नहीं माना जाएगा और वे इस आईडी को प्राप्त करने के विधिक पात्र नहीं होंगे।

नियोजन विभाग के उच्च स्तर से इस विधिक प्रगति की सराहना करते हुए नियोजन सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि देवभूमि परिवार आईडी प्रदेश के आम नागरिकों के जीवन को सुगम (Ease of Living) बनाने के लिए एक क्रांतिकारी विधिक कदम साबित होगी। इससे न केवल पात्र लाभार्थियों तक शत-प्रतिशत विधिक लाभ सीधे पहुंचेगा, बल्कि राज्य की लोक-कल्याणकारी नीतियों को तैयार करने में भी शासन को सटीक और प्रामाणिक विधिक आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे। राजभवन की विधिक संस्तुति के बाद सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और नियोजन विभाग अब इस योजना के डिजिटल रोल-आउट की विधिक अधिसूचना जारी करने की तैयारी में जुट गया है।

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