
हल्द्वानी। कभी शादी के सीजन में गुलजार रहने वाले सर्राफा बाजारों की रौनक इस बार गायब है। लगातार बढ़ती सोने-चांदी की कीमतों ने आम जनता का बजट इस कदर बिगाड़ दिया है कि बाजारों से पहले जैसी भीड़ नदारद है। तीन साल में सोने के दाम करीब तीन गुना तक बढ़ चुके हैं, जिसके चलते दूल्हा-दुल्हन के लिए खरीदे जाने वाले आभूषण अब छोटे और हल्के हो गए हैं। सर्राफा कारोबारियों के अनुसार, ग्राहक अब गहनों की संख्या कम करने के बजाय उनके वजन में भारी कटौती कर रहे हैं। बाजार में अब लोग निवेश या दिखावे के बजाय सिर्फ जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी कर रहे हैं।
सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष घनश्याम रस्तोगी ने बताया कि कुमाऊं में पारंपरिक रूप से 22 कैरेट सोने के आभूषण ही खरीदे जाते हैं, लेकिन बीते दो वर्षों में आई भारी तेजी के कारण अब एक से नौ ग्राम तक के हल्के आभूषणों (जैसे चेन, अंगूठी, पेंडेंट) की मांग बढ़ गई है। आलम यह है कि पहले जो पारंपरिक नथ 10 ग्राम की बनती थी, वह अब मात्र 4 से 5 ग्राम में तैयार हो रही है। ढाई तोले की पौंची अब 8 से 9 ग्राम में और ढाई से साढ़े तीन तोले का हार अब घटकर सिर्फ 6 से 7 ग्राम का रह गया है। यही नहीं, दो से तीन तोले के झुमकों की जगह अब लोग 5 से 6 ग्राम के हल्के डिजाइन पसंद कर रहे हैं। चंद्रिका ज्वैलर्स के प्रदीप कुमार और सर्राफा व्यापारी राजीव अग्रवाल का कहना है कि पहले लोग डिजाइन पसंद करते थे, लेकिन अब ग्राहक पहले से बजट तय कर दुकान पर आते हैं और कम ग्राम में अच्छे विकल्प की मांग करते हैं।
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतें भी आम लोगों के बजट से बाहर हो चुकी हैं। तनिष्क ज्वैलर्स के नीपुन के अनुसार, पहले जो चांदी की पायल 5 हजार रुपये में मिल जाती थी, उसकी कीमत अब करीब 13 हजार रुपये तक पहुंच गई है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए शादी का बजट संभालना एक बड़ी चुनौती बन गया है। सर्राफा बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2024 में 22 कैरेट सोने की कीमत ₹58,100 प्रति 10 ग्राम थी, जो 2025 में ₹70,100 और साल 2026 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर ₹1,50,200 प्रति 10 ग्राम हो गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतों में यही तेजी बनी रही, तो आने वाले समय में भारी और पारंपरिक गहने सिर्फ चुनिंदा अमीर वर्ग तक ही सीमित रह जाएंगे।
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