हल्द्वानी में कांग्रेस नेता और पूर्व दर्जा राज्यमंत्री हरीश पनेरू ने आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए एक अनोखा और धार्मिक संदेश से जुड़ा चुनावी एजेंडा पेश किया है। उन्होंने चुनाव में बढ़ते शराब और पैसे के प्रभाव को रोकने के लिए ‘अध्यात्म’ का सहारा लेने का निर्णय लिया है।
यहाँ उनकी प्रेस वार्ता और आगामी अभियान का मुख्य विवरण दिया गया है:
हल्द्वानी (17 अप्रैल 2026): शुक्रवार को नैनीताल रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कांग्रेस नेता हरीश पनेरू ने प्रदेश की चुनावी व्यवस्था में बढ़ते नशे के चलन पर गहरी चिंता व्यक्त की।
1. अभियान का मुख्य उद्देश्य
पनेरू ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य देवभूमि उत्तराखंड को नशे के चंगुल से मुक्त करना है:
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शराब का बहिष्कार: उन्होंने कहा कि पहाड़ में शराब और पैसे के दम पर चुनाव जीतने की परंपरा को खत्म करना अनिवार्य है।
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संस्कृति का संरक्षण: वह लोगों को गीता का ज्ञान और हनुमान जी की शक्ति याद दिलाकर नैतिक मूल्यों को जगाना चाहते हैं।
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सुहाग की रक्षा: उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि वह नशे के कारण उजड़ने वाले परिवारों और बहनों के सुहाग को बचाना चाहते हैं।
2. प्रशासन से लेकर आम जनता तक पहुँच
हरीश पनेरू ने घोषणा की है कि वह किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अपना संदेश हर खास-ओ-आम तक पहुँचाएंगे:
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वितरण सामग्री: वह घर-घर जाकर गंगाजल, हनुमान चालीसा और गीता जैसे धार्मिक ग्रंथ बांटेंगे।
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प्रशासनिक स्तर: वह जिलाधिकारी (DM), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), विधायक और कमिश्नर से भी मुलाकात कर उन्हें इस अभियान का हिस्सा बनने का आह्वान करेंगे।
3. ‘देवभूमि’ के मान का चुनावी एजेंडा
पनेरू ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपना रुख साफ कर दिया है:
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उन्होंने कहा, “यह देवभूमि है और इस बार चुनाव का मेरा यही मुख्य एजेंडा है।”
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उनका मानना है कि जब लोग धार्मिक ग्रंथों और गंगाजल की मर्यादा से जुड़ेंगे, तो वे शराब जैसे प्रलोभनों का चुनाव के दौरान बहिष्कार करेंगे।
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