हिमालय प्रहरी

पद बड़ा हो या छोटा, भ्रष्टाचार किया तो सख्त कार्रवाई होगी और सीधा जेल भेजा जाएगा – सीएम धामी

खबर शेयर करें -

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने हरिद्वार में 54 करोड़ रुपये के बड़े जमीन घोटाले पर सख्त कार्रवाई करते हुए, तत्कालीन जिलाधिकारी (DM) और नगर आयुक्त समेत सात अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह उत्तराखंड के इतिहास में दूसरा मौका है जब किसी जिलाधिकारी को किसी मामले में दोषी पाए जाने पर निलंबित किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के मामले में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरतेगी।

मुख्यमंत्री धामी का ‘जीरो टॉलरेंस’ संदेश:

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कार्रवाई पर बोलते हुए कहा, “हमारी सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलती है। हम इसे जमीनी स्तर से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जैसे ही हरिद्वार भूमि घोटाले का मामला मेरे संज्ञान में आया, तुरंत कार्रवाई की गई। अवैध भूमि लेनदेन में शामिल लोगों के खाते फ्रीज कर दिए गए। जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद तत्कालीन नगर आयुक्त, जिला अधिकारी और प्रशासक समेत सात अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। अब पूरे मामले की गहन जांच के लिए विजिलेंस को सौंप दिया गया है।”

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार का स्पष्ट उद्देश्य राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना और प्रशासन में जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि हाल के महीनों में सरकार ने यह दिखा दिया है कि अब सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि बड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी, चाहे उनका पद या प्रभाव कितना ही बड़ा क्यों न हो। पहले जिन अधिकारियों पर सवाल उठाने में लोग हिचकते थे, अब उनके खिलाफ भी कठोर कदम उठाए जा रहे हैं।

क्या है हरिद्वार जमीन घोटाला?

यह पूरा मामला साल 2024 से जुड़ा है, जब हरिद्वार नगर निगम ने नगर निगम चुनाव के दौरान ग्राम सराय में 54 करोड़ रुपये में 2.3070 हेक्टेयर जमीन खरीदी थी। उस समय हरिद्वार नगर निगम की जिम्मेदारी तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी के हाथों में थी। आरोप है कि नगर निगम ने जो जमीन खरीदी थी, उसकी वास्तविक कीमत केवल 13 करोड़ रुपये थी, लेकिन उसे 54 करोड़ रुपये में खरीदा गया। आज तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर यह जमीन किस उद्देश्य के लिए खरीदी गई थी, जिससे इस पूरे लेनदेन पर सवाल उठ रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए, अब पूरी जांच विजिलेंस को सौंप दी गई है।

Exit mobile version