
राजू अनेजा, काशीपुर।जमीनी विवाद में 80 वर्षीय किसान ओम प्रकाश अरोड़ा की सदमे में हुई मौत ने काशीपुर में प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब मामला तूल पकड़ता जा रहा है।यह सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता का बड़ा उदाहरण बन चुका है।
गदरपुर विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे ने पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर शोक संतप्त परिजनों को ढांढस बंधाया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
इस दौरान पांडे ने प्रशासन और अधिकारियों पर सीधा हमला बोलते हुए कहा—“अगर सिस्टम समय पर जागता और जिम्मेदारी निभाता, तो ओम प्रकाश अरोड़ा की जान बच सकती थी।” उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह सिर्फ एक प्राकृतिक मौत नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट रवैये का नतीजा है।
पांडे ने आरोप लगाया कि उधम सिंह नगर में भूमाफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि आम आदमी की जमीन ही नहीं, उसकी जिंदगी भी खतरे में है। उन्होंने कहा कि एक बुजुर्ग को न्याय पाने की कीमत अपने प्राणों से चुकानी पड़ी, जो बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है।
उन्होंने यह भी कहा कि दिवंगत के पुत्र जितेंद्र अरोड़ा आज न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं, जो इस पूरे सिस्टम की नाकामी को उजागर करता है।
विधायक ने भरोसा दिलाया कि वह इस मामले को गंभीरता से उठाएंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए हर स्तर पर आवाज बुलंद करेंगे।
घटना के बाद इलाके में लोगों में भारी आक्रोश है।इधर स्थानीय लोग भी खुलकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या इस मौत के बाद सिस्टम सच में जागेगा, या फिर एक और मामला फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा?