
रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)। ‘तकनीकी काम केवल लड़कों के बस का है’—कभी कही जाने वाली यह पुरानी धारणा अब इतिहास बन चुकी है। रुद्रपुर सिडकुल स्थित ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स और एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों में आईटीआई पास बेटियां मशीनों पर कुशलता से काम कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। सिडकुल की विभिन्न कंपनियों में पिछले तीन वर्षों के दौरान कुशल महिला कर्मचारियों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में श्रम विभाग और कंपनी प्रबंधनों के आंकड़ों के अनुसार, फिटर, इलेक्ट्रीशियन, इलेक्ट्रॉनिक्स और टूल एंड डाई जैसे कठिन ट्रेडों में 700 से अधिक आईटीआई पास बेटियां सफलतापूर्वक अपनी सेवाएं दे रही हैं और हर महीने 25 से 30 हजार रुपये तक सम्मानजनक कमाई कर रही हैं।
कैंपस प्लेसमेंट से सीधे मिली नौकरी, सुरक्षा और ट्रांसपोर्ट की बेहतर व्यवस्था
रुद्रपुर स्थित राजकीय आईटीआई तथा विभिन्न निजी प्रशिक्षण संस्थानों से पास आउट होने के बाद इन बेटियों को सीधे कैंपस प्लेसमेंट के माध्यम से सिडकुल की नामी कंपनियों में रोजगार प्राप्त हुआ है। कंपनियों द्वारा भी महिला कर्मचारियों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनमें अलग शिफ्ट, कड़ा सुरक्षा घेरा और पिक-एंड-ड्रॉप ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था शामिल है। एक कंपनी में कार्यरत नेहा चौहान ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने फिटर ट्रेड से आईटीआई किया था और 12 हजार रुपये प्रतिमाह से शुरुआत की थी। आज तीन वर्ष की कड़ी मेहनत और प्रमोशन के बल पर उनका वेतन 28 हजार रुपये पहुंच गया है, जिससे वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक मदद कर रही हैं, बल्कि समाज में उनका मान-सम्मान भी बढ़ा है।
कंपनियों की पहली पसंद बनीं बेटियां, सिडकुल एसोसिएशन ने भी सराहा
कंपनी प्रबंधकों और एचआर (HR) अधिकारियों का मानना है कि लड़कियां काम के प्रति अत्यधिक अनुशासित, फुर्तीली और गुणवत्ता (Quality) को लेकर काफी सजग रहती हैं। इसी कारण असेंबली लाइन और क्वालिटी चेकिंग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है। सिडकुल एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह तथा पूर्व अध्यक्ष अजय तिवारी ने बताया कि पिछले तीन सालों में फैक्टरियों में महिला कर्मियों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। बेटियां आज हर क्षेत्र में लड़कों से आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाल रही हैं। कई औद्योगिक इकाइयों ने आईटीआई में ‘वुमन स्किल सेल’ भी स्थापित किए हैं ताकि अधिक से अधिक बेटियों को प्रशिक्षित कर रोजगार के अवसर दिए जा सकें।
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