रोजाना हजारों लोगों का आवागमन, खतरा बढ़ा
द्रोणा सागर परिसर में हर दिन सुबह और शाम हजारों लोग वॉक, योग और व्यायाम के लिए पहुंचते हैं। यहां न सिर्फ बुजुर्ग और युवा बल्कि बच्चे भी बड़ी संख्या में आते हैं।
इसके अलावा परिसर में तीरंदाजी, योग और अन्य खेल गतिविधियों का नियमित प्रशिक्षण भी दिया जाता है। ऐसे में इस सूखे पेड़ का खतरा और भी गंभीर हो जाता है।
कई बार शिकायत, फिर भी कार्रवाई शून्य
स्थानीय लोगों ने बताया कि इस मामले को लेकर केडीएफ के अध्यक्ष राजीव घई के माध्यम से वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है।
इसके बावजूद आज तक न तो पेड़ को हटाने की कार्रवाई हुई और न ही कोई सुरक्षा इंतजाम किए गए। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी साफ नजर आ रही है।
केडीएफ की आवाज को भी किया अनसुना
हालांकि द्रोणा सागर की देखरेख की जिम्मेदारी केडीएफ (काशीपुर डेवलपमेंट फाउंडेशन) निभा रहा है और उनके द्वारा भी कई बार प्रशासन को सूचना भी दी जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अब तक इस सूखे पेड़ को हटाने की कवायद शुरू नहीं हो सकी है।
नतीजा यह है कि रोजाना यहां आने वाले लोग अपनी जान जोखिम में डालकर वॉक करने को मजबूर हैं।
अंधेरे में और खतरनाक होता परिसर
समस्या सिर्फ सूखे पेड़ तक सीमित नहीं है। द्रोणा सागर परिसर में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने के कारण शाम के समय अंधेरा छा जाता है।
अंधेरे में वॉकिंग ट्रैक पर चलना और भी जोखिम भरा हो जाता है। लोगों को गिरने और चोट लगने का डर बना रहता है।
सोलर लाइट लगाने की उठी मांग
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे परिसर में सोलर लाइटें लगाई जाएं, ताकि शाम के समय भी सुरक्षित माहौल मिल सके।
लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं का अभाव बेहद चिंताजनक है।
हादसे के इंतजार में प्रशासन?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहे हैं?
यदि समय रहते इस सूखे पेड़ को नहीं हटाया गया, तो यह लापरवाही किसी दिन बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं—क्या समय रहते कार्रवाई होगी या फिर द्रोणा सागर में कोई बड़ा हादसा प्रशासन को जगाएगा?