
लालकुआं: उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। सूबे की सबसे हॉट सीटों में शुमार 56-लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में सियासी पारा अभी से चढ़ने लगा है। विभिन्न राजनीतिक दलों के दावेदारों ने गली-कूचों और सोशल मीडिया पर अपनी उपलब्धियों का प्रचार करते हुए सक्रियता बढ़ा दी है। इस बीच, लालकुआं की राजनीति में एक नया दिलचस्प मोड़ आ गया है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में अन्य विधानसभा क्षेत्रों के ‘बाहरी’ नेताओं की बढ़ती दखलअंदाजी और दावेदारी ने विपक्षी कांग्रेस खेमे को नई ‘संजीवनी’ दे दी है।
‘बाहरी बनाम स्थानीय’ मुद्दे से कांग्रेस उत्साहित
राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर चल रही चुनावी बयानबाजी को देखें, तो विपक्षी खेमे का मानना है कि सत्ताधारी दल के भीतर चल रही यह खींचतान उनके लिए राह आसान कर सकती है।
-
विपक्ष का आकलन: कांग्रेस रणनीतिकारों का मानना है कि यदि भाजपा किसी स्थानीय चेहरे के बजाय बाहर से आए किसी प्रत्याशी को चुनावी मैदान में उतारती है, तो स्थानीय मतदाताओं की नाराजगी का सीधा विधिक फायदा कांग्रेस को मिलेगा।
-
स्थानीय भावनाएं: क्षेत्र के राजनैतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि लालकुआं की जनता हमेशा स्थानीय मुद्दों और स्थानीय जुड़ाव को प्राथमिकता देती है, ऐसे में किसी बाहरी नेता का यहां सफल होना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।
पिता की विरासत और युवाओं के दम पर हेमवती नंदन दुर्गापाल प्रबल दावेदार
लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल के पुत्र हेमवती नंदन दुर्गापाल की सक्रियता इन दिनों काफी तेज है। क्षेत्र में चर्चाएं हैं कि वे कांग्रेस टिकट के सबसे मजबूत और प्रबल दावेदार बनकर उभर रहे हैं:
-
पिता के पदचिह्नों पर विकास की आस: पार्टी के कार्यक्रमों, धरनों और जनहित के बुनियादी मुद्दों पर निरंतर आवाज उठाने के कारण उनकी जनता के बीच अच्छी पैठ बनी है।
-
संगठन और बूथ स्तर पर सक्रियता: वर्तमान में वे लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क, संगठन विस्तार और बूथ कमेटियों को मजबूत करने के अभियानों का खुद नेतृत्व कर रहे हैं। समर्थकों का अटूट विश्वास है कि यदि उन्हें मौका मिलता है, तो वे अपने पिता की तरह विकास की राजनीति को आगे बढ़ाते हुए क्षेत्र के रुके हुए विकास कार्यों को नई गति देंगे।
हरेंद्र सिंह बोरा: निर्दलीय रहकर भी हिला दी थी सत्ता की चूलें, रेस में दूसरे सबसे मजबूत चेहरे
कांग्रेस पार्टी के भीतर टिकट की रेस में दूसरा सबसे प्रबल और कद्दावर नाम वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हरेंद्र सिंह बोरा का माना जा रहा है।
-
मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि: हरेंद्र बोरा क्षेत्र के एक बेहद सक्रिय राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो लंबे समय से कांग्रेस संगठन के लिए धरातल पर काम कर रहे हैं।
-
2017 का ऐतिहासिक प्रदर्शन: हरेंद्र बोरा की जमीनी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने साल 2017 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में लालकुआं सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था और सत्ता की लहर के बावजूद भारी वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे।
वर्तमान में बोरा लगातार स्थानीय कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के साथ विधिक बैठकें कर रहे हैं। वे बूथ स्तर पर पार्टी के कुनबे को बढ़ाने में जुटे हैं, जिससे लालकुआं कांग्रेस के भीतर का यह आंतरिक मुकाबला और आगामी मुख्य चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है।
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें