
लालकुआं: प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल लालकुआं इकाई के त्रिवार्षिक चुनाव में इस बार इतिहास रचने की तैयारी चल रही है। अध्यक्ष पद के सबसे कद्दावर और अनुभवी प्रत्याशी, वर्तमान अध्यक्ष दीवान सिंह बिष्ट (दानी भाई) एक बार फिर स्थानीय व्यापारियों की पहली और निर्विवाद पसंद बनकर उभरे हैं। लगातार दो सफल कार्यकालों की शानदार उपलब्धियों के दम पर चुनावी मैदान में उतरे दीवान सिंह बिष्ट के पक्ष में बाजार से लेकर सोशल मीडिया तक ऐसी जबरदस्त ‘लहर’ दिखाई दे रही है, जिससे क्षेत्र में उनकी जीत की हैट्रिक लगाने की संभावना सबसे प्रबल हो गई है। दो बार अध्यक्ष रहने के बावजूद व्यापारियों के बीच उनके खिलाफ किसी भी प्रकार के असंतोष या एंटी-इन्कंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) का न होना, उनके मजबूत और बेदाग जनाधार की गवाही दे रहा है।
जाति-धर्म से ऊपर सर्वसमावेशी नेतृत्व; ईद मिलन ने प्रतिद्वंदियों पर बनाई भारी बढ़त
लालकुआं क्षेत्र के मुख्य बाजारों और चौराहों पर इस समय केवल ‘दानी भाई’ के नाम की ही गूंज है। उनकी इस प्रचंड लोकप्रियता के पीछे उनका सर्वसमावेशी दृष्टिकोण और धर्मनिरपेक्ष छवि है:
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सौहार्द की मिसाल: ईद के पावन अवसर पर दीवान सिंह बिष्ट ने मुस्लिम बाहुल्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों में जाकर जिस आत्मीयता के साथ ईद मिलन किया, उसने सभी वर्गों के व्यापारियों का दिल जीत लिया।
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बिना भेदभाव नेतृत्व: स्थानीय दुकानदारों का मानना है कि बिष्ट ने कभी भी जाति, धर्म या छोटे-बड़े वर्ग के आधार पर व्यापारियों में फर्क नहीं किया। वे हर व्यवसायी को समान मानते हैं और यही वजह है कि समाज के हर तबके का वोट बैंक उनके पक्ष में लामबंद हो चुका है।
सोशल मीडिया पर ‘एडवांस’ बधाइयों की बाढ़, न्यूट्रल वोटर्स पर पड़ा गहरा असर
डिजिटल मोर्चे पर भी दीवान सिंह बिष्ट के प्रतिद्वंदी उनके आस-पास टिकते नजर नहीं आ रहे हैं। फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर स्थानीय व्यापारियों और समर्थकों द्वारा उन्हें ‘एडवांस’ में जीत की बधाई और समर्थन देने वाली पोस्ट्स की बाढ़ आ गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह अग्रिम बधाई संदेश बाजार में एकतरफा चुनावी माहौल बनाने का काम कर रहे हैं, जिससे अभी तक असमंजस में रहने वाले ‘न्यूट्रल वोटर्स’ (तटस्थ मतदाता) भी तेजी से बिष्ट के पक्ष में आकर्षित हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर मिल रही इस प्रचंड सफलता से उनके कार्यकर्ताओं का उत्साह सातवें आसमान पर है और वे दोगुनी ऊर्जा के साथ जनसंपर्क में जुटे हैं।
जीत की राह के चार मजबूत स्तंभ: क्यों दानी भाई हैं सबसे आगे?
व्यापारियों के बीच दीवान सिंह बिष्ट के प्रति इस अटूट जुड़ाव की कई धरातलीय वजहें हैं, जिन्हें उनके समर्थक मुख्य ताकत मान रहे हैं:
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अतीत के ऐतिहासिक कार्य: पिछले दो कार्यकालों के दौरान अतिक्रमण, टैक्स, और लोकल पुलिसिंग जैसे गंभीर मुद्दों पर उन्होंने हमेशा शासन-प्रशासन के सामने व्यापारियों का पक्ष पूरी मजबूती और निडरता से रखा।
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सीधा और सुलभ संवाद: वे एक ऐसे सुलभ नेता हैं जिनसे मिलने के लिए किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं होती। बाजार का हर छोटा रेहड़ी-पटरी वाला भी उनसे सीधे संवाद कर सकता है।
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संकटकाल में ढाल: व्यापारिक मंदी हो, वैश्विक महामारी का दौर रहा हो या स्थानीय स्तर पर कोई विभागीय विवाद, ‘दानी भाई’ हमेशा व्यापारियों के आगे ढाल बनकर खड़े रहे।
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कर्मठ एवं जुझारू छवि: व्यापारियों का अटूट विश्वास है कि व्यापार मंडल को गुटबाजी से मुक्त रखकर केवल बिष्ट ही पारदर्शी तरीके से आगे ले जा सकते हैं।
चुनावी चर्चाओं और जमीनी रुझानों को देखें तो स्पष्ट है कि लालकुआं के व्यापारी अपने परखे हुए और कर्मठ सिपहसालार को ही दोबारा कमान सौंपने का मन बना चुके हैं, जिससे विपक्ष की राह बेहद कठिन हो गई है।
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