उन्होंने कहा कि मालवा साम्राज्य की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने अपने जीवनकाल में एक हजार से अधिक कुएं, मंदिर, धर्मशालाएं और अन्य जनहितकारी निर्माण कराए। देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर, अयोध्या तथा मथुरा सहित अनेक तीर्थस्थलों के विकास और पुनर्निर्माण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने जीवनभर समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य किया तथा बिना किसी भेदभाव के जनसेवा को अपना धर्म माना।
अलका पाल ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने महिला सशक्तिकरण और विधवा महिलाओं के कल्याण के लिए भी उल्लेखनीय कार्य किए। महिलाओं की शिक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता को लेकर उनकी दूरदर्शी सोच आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ जैसी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और विकास में उनका योगदान सदियों तक याद किया जाएगा। वर्तमान पीढ़ी को उनके आदर्शों और जनहितकारी कार्यों से प्रेरणा लेकर समाज निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
शरबत वितरण कर दी श्रद्धांजलि
इधर महाराणा प्रताप चौक पर पाल महासभा के तत्वावधान में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने राहगीरों को शरबत वितरित कर लोकमाता को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में ब्रह्मपाल, सुभाष पाल, डॉ. करण सिंह पाल, अमर सिंह पाल, जगदीश पाल, राजपाल सिंह पाल, विजय चौधरी, अनिल पाल, राजकुमार पाल, मुकुल पाल, सोमपाल, उपेंद्र पाल, धीरज पाल, नारायण पाल, हेम पाल, प्रदीप पाल, महिपाल, ओमप्रकाश पाल, हेम सिंह पाल, तुलाराम पाल, राजेंद्र पाल, विजेंद्र पाल, गजेंद्र पाल, कुंवर सिंह, कुमार पाल, विनोद पाल, मुशर्रफ हुसैन, जितेंद्र सरस्वती समेत बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।
