
दृश्यकथा 3.0’ की प्रदर्शनी में हाथोहाथ बिक गयी कई कलाकृतियां
राजू अनेजा,काशीपुर। ज्ञानार्थी मीडिया कॉलेज परिसर में आयोजित वार्षिक कला प्रदर्शनी ‘दृश्यकथा 3.0’ ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि रचनात्मकता की कोई उम्र नहीं होती। विद्यार्थियों के नन्हे हाथों से उकेरी गई कलाकृतियों ने प्रदर्शनी में पहुंचने वाले हर दर्शक को मंत्रमुग्ध कर दिया। कला प्रेमियों की भीड़ के बीच शहर की कई प्रतिष्ठित हस्तियों और गणमान्य लोगों ने विद्यार्थियों की कृतियों की न सिर्फ सराहना की, बल्कि उन्हें खरीदकर उनका उत्साह और आत्मविश्वास भी बढ़ाया।
प्रदर्शनी का शुभारंभ प्रातः 9 बजे विधायक त्रिलोक सिंह चीमा द्वारा किया गया। उद्घाटन के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों की कला को सराहनीय बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं की रचनात्मक ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं। प्रदर्शनी के शुभारंभ के बाद परिसर में दिनभर कला प्रेमियों का आवागमन बना रहा।
प्रदर्शनी में फाइन आर्ट्स, फैशन डिजाइन, एनीमेशन एवं विजुअल आर्ट्स विभाग के विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई विविध कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया। विद्यार्थियों की रचनाओं ने रंगों, रेखाओं और कल्पनाओं के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई, जिसने दर्शकों को काफी देर तक ठहरने पर मजबूर कर दिया।
प्रदर्शनी में वेस्ट फैब्रिक से बनाए गए सस्टेनेबल फैब्रिक डिजाइन, हैंडमेड परिधान, ऑयल व कैनवास पर बनी आकर्षक पेंटिंग्स, भारतीय पारंपरिक कला शैलियों पर आधारित चित्र तथा पहाड़ी संस्कृति को दर्शाते पिछौड़ा जैसे पारंपरिक परिधान विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ प्रस्तुत की गई कृतियों ने दर्शकों को गहराई से सोचने पर मजबूर किया।
विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई कई पेंटिंग्स इतनी जीवंत और भावपूर्ण रहीं कि दर्शकों को ऐसा प्रतीत हुआ मानो वे स्वयं अपनी कहानी बयां कर रही हों। कला के माध्यम से विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण, पुस्तक प्रेम, संस्कृति, लोकजीवन और समकालीन सामाजिक सरोकारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
प्रदर्शनी में पहुंचे अतिथियों ने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को मोबाइल और डिजिटल दुनिया से दूर रखकर पुस्तकों, कला और सृजनशीलता से जोड़ते हैं। इससे न केवल उनकी कल्पनाशक्ति का विकास होता है, बल्कि उनका नैतिक और बौद्धिक स्तर भी मजबूत होता है।
कॉलेज के अध्यक्ष संतोष मेहरोत्रा ने बताया कि दृश्यकथा 3.0 केवल एक कला प्रदर्शनी नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने का सशक्त प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों ने आयोजन की मुक्त कंठ से सराहना की और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए ऐसे रचनात्मक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
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