देहरादून (27 मार्च 2026): पश्चिमी वृत्त जैसे संवेदनशील इलाकों में अवैध खनन और लकड़ी तस्करी की घटनाओं ने वनकर्मियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। हाल ही में एक एसडीओ के साथ हुई मारपीट और कर्मियों को बंधक बनाए जाने की घटनाओं के बाद सरकार ने विभाग के शस्त्रीकरण (Arming) का प्रस्ताव तैयार किया है।
1. हथियारों की खेप: क्या-क्या खरीदेगा विभाग?
वन विभाग ने शासन को 59.41 लाख रुपये का एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा है, जिसमें निम्नलिखित अत्याधुनिक हथियार शामिल हैं:
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32 पिस्तौल (MK-II): अधिकारियों और गश्ती दल के लिए क्लोज-रेंज सुरक्षा हेतु।
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30.06 एसपी राइफल: लंबी दूरी तक मार करने और बड़े अभियानों के लिए।
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सुरक्षा उपकरण: बुलेटप्रूफ जैकेट और अन्य संचार उपकरण भी इस प्रस्ताव का हिस्सा हैं।
2. लाइसेंस की जटिलता: अब पुलिस की तर्ज पर होंगे अधिकार
हथियार होने के बावजूद लाइसेंसिंग की लंबी प्रक्रिया एक बड़ी बाधा रही है। इसे दूर करने के लिए वन मंत्री ने दो महत्वपूर्ण बदलावों का संकेत दिया है:
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नियमों में शिथिलता: वनकर्मियों के लिए व्यक्तिगत लाइसेंस की लंबी औपचारिकताओं को कम किया जाएगा।
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विभागीय अधिकार: पुलिस विभाग की तर्ज पर वन विभाग को भी अपने कर्मियों के लिए हथियार आवंटन और लाइसेंस संबंधी कुछ स्वायत्त अधिकार देने पर विचार चल रहा है।
3. क्यों पड़ी हथियारों की जरूरत? (चुनौतियां)
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संगठित माफिया: खनन और वन तस्कर अब केवल स्थानीय अपराधी नहीं, बल्कि आधुनिक हथियारों से लैस संगठित गिरोह बन चुके हैं।
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सीधा टकराव: गश्त के दौरान वनकर्मियों का अक्सर माफियाओं से आमना-सामना होता है, जहाँ पारंपरिक साधनों (लाठी) के कारण वनकर्मी असुरक्षित महसूस करते हैं।
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हालिया घटनाएं: एसडीओ के साथ मारपीट का वायरल वीडियो और मुठभेड़ की बढ़ती घटनाओं ने विभाग के भीतर मनोबल पर असर डाला था।
Snapshot: उत्तराखंड वन सुरक्षा अपग्रेड 2026
| विवरण | जानकारी |
| प्रस्तावित बजट | ₹59.41 लाख |
| मुख्य हथियार | 32 पिस्तौल (MK-II) और 30.06 SP राइफल |
| संवेदनशील क्षेत्र | पश्चिमी वृत्त (तराई और भाबर इलाके) |
| विभागीय नेतृत्व | सुबोध उनियाल (वन मंत्री) |
| मुख्य लक्ष्य | अवैध खनन और वन्यजीव तस्करी पर लगाम |
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