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नैनीताल हाईकोर्ट का सख्त रुख: छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में सरकार से पूछा- ‘क्यों दर्ज नहीं हुआ मुकदमा?’, 28 अप्रैल तक मांगी रिपोर्ट

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नैनीताल (24 अप्रैल 2026): ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी भीमताल की बीसीए द्वितीय वर्ष की छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह 28 अप्रैल तक विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करे।

परिजनों को क्यों करानी पड़ी ‘जीरो एफआईआर’?

अदालत ने सरकार से विशेष रूप से यह स्पष्ट करने को कहा है कि जब छात्रा के परिजन शिकायत लेकर पहुँचे थे, तो मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया? इसी लापरवाही के कारण पीड़ित परिवार को मजबूरन लखनऊ में जाकर ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज करानी पड़ी। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर स्थानीय स्तर पर कार्रवाई में देरी की वजह क्या रही।

रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना का आरोप

लखनऊ निवासी छात्रा के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी व्यथा सुनाई है। याचिका के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • सीनियर द्वारा रैगिंग: छात्रा अक्सर फोन पर घर वालों को बताती थी कि कुछ सीनियर छात्र उसकी रैगिंग कर रहे हैं, जिससे वह काफी परेशान और तनाव में थी।

  • संदिग्ध मौत: कॉलेज प्रशासन ने परिजनों को सूचना दी कि छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

  • पुलिस पर दबाव का आरोप: पिता का आरोप है कि जब उन्होंने भवाली थाने में शिकायत दी, तो पुलिस ने कथित तौर पर कॉलेज के दबाव में आकर मामला दर्ज करने से मना कर दिया।

CCTV फुटेज और साक्ष्यों की अनदेखी

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि कॉलेज गेट के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज में छात्रा के साथ हुई छेड़छाड़ के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। इसके बावजूद भवाली पुलिस ने मामले की गंभीरता को नहीं समझा। लखनऊ पुलिस द्वारा मामला भवाली स्थानांतरित किए जाने के बाद भी जांच में कोई प्रगति नहीं हुई।

न्यायालय का आदेश और अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए सरकार को निर्देश दिए हैं कि उन पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जाए जिन्होंने प्राथमिकी दर्ज करने में आनाकानी की। अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी, जिसमें सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।

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