हिमालय प्रहरी

काशीपुर में 62 करोड़ की अमृत योजना में घुल रहा ज़हर, इंदौर की मौतों के बाद भी सिस्टम बेखबर

खबर शेयर करें -

पाइपलाइन लीकेज से टोटियों तक पहुंच रहा दूषित पानी

राजू अनेजा,काशीपुर। शुद्ध पेयजल के नाम पर लागू की गई अमृत योजना काशीपुर में अब जनता की सेहत के लिए खतरा बनती जा रही है। करीब 62 करोड़ रुपये खर्च कर बिछाई गई पाइपलाइनों में लीकेज के जरिए गड्ढों का गंदा पानी घुलने का खतरा बना हुआ है। हालात यह हैं कि अमृत का पानी सड़कों पर बह रहा है और घरों की टोटियों तक दूषित पानी पहुंचने की आशंका गहराती जा रही है।

 

आपको बताते चले कि अमृत योजना के तहत करीब चार साल पहले काशीपुर को आठ जोन में बांटकर जल निगम ने लगभग 62 करोड़ रुपये खर्च कर नई पाइपलाइन बिछाई थी। इसके साथ ही सभी जोनों में ओवरहेड टैंक भी बनाए गए।
आंकड़ों पर नजर डालें तो
जोन-1 में 3.69 करोड़,
जोन-1 बी में 6.67 करोड़,
जोन-5 में 16.18 करोड़,
जोन-3 में 10.70 करोड़,
जोन-2 में 11.28 करोड़
और जोन-8 में 12.68 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
इतनी भारी-भरकम राशि खर्च होने के बावजूद आज हालात यह हैं कि अमृत का पानी सड़कों पर बह रहा है और घरों तक गंदगी पहुंच रही है।

 

सड़कों पर बहता अमृत, गड्ढों से घरों में घुसता गंदा पानी

समय बीतने के साथ सड़क निर्माण और भारी वाहनों की आवाजाही ने पाइपलाइन सिस्टम की पोल खोल दी है। कई इलाकों में लीकेज के चलते सप्लाई के समय पानी सड़कों पर बहता रहता है, जबकि सप्लाई बंद होने के बाद गड्ढों में जमा दूषित पानी पाइपलाइन के जरिए घरों में पहुंचने की आशंका बनी रहती है।

 

इन इलाकों में महीनों से लीकेज, फिर भी मरम्मत नहीं

शहर के सीतापुर आंखों के अस्पताल, पदमावती कॉलोनी, और पॉलीटेक्निक क्षेत्र के पास लंबे समय से पाइपलाइन लीकेज की शिकायतें हैं। कई जगहों पर लीकेज के कारण सड़कें और टाइल्स तक धंसने लगी हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभागीय अधिकारी और कर्मचारी आंख मूंदे बैठे हैं।

 

इंदौर हादसे के बाद भी लापरवाही बरकरार

 

इंदौर की घटना के बाद जल संस्थान के मुख्यालय रामनगर से लीकेज पाइपलाइनों को जल्द ठीक करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद ग्राउंड लेवल पर सुधार नजर नहीं आ रहा। शहर के कई इलाकों से लगातार लीकेज की शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन कार्रवाई कागजों तक ही सीमित दिखाई दे रही है।

बड़ा सवाल
62 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी यदि जनता को शुद्ध पेयजल की गारंटी नहीं, तो अमृत योजना का लाभ आखिर किसे मिला? कहीं ऐसा न हो कि प्रशासन की लापरवाही किसी बड़े हादसे की वजह बन जाए।

 

 

“इंदौर की घटना के बाद जल संस्थान के मुख्यालय रामनगर से पत्राचार कर लीकेज पाइपलाइनों को जल्द रिपेयर करने के निर्देश दिए गए हैं। जहां-जहां लीकेज हैं, उन्हें बंद कराया जाएगा।”
— दीपक बाली, मेयर, काशीपुर

Exit mobile version