वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत बीते दिन रामनगर पहुँचे, जहाँ उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य और राज्य में लागू यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर बात की।
👤 राजनीतिक संन्यास और नई पीढ़ी
जब हरीश रावत से पूछा गया कि पार्टी की नई टीम में उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है, तो क्या वे संन्यास ले रहे हैं, इस पर उन्होंने हँसते हुए कहा:
“अभी मैंने भगवा कपड़ा नहीं देखा है, लेकिन जब आप कहेंगे तो सिलवा लेंगे। संन्यास भी एक आदरणीय अवस्था है, पर अभी मेरा काम नए लोगों को उत्साहित करना है।“
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस में नई पीढ़ी को आगे लाने का समय है और वे उन्हें सहयोग व मार्गदर्शन देने के लिए सक्रिय रहेंगे। रावत ने राजनीति को केवल पद पाने का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा और संघर्ष का रास्ता बताया।
🚫 UCC से आधार की अनिवार्यता हटाने पर हमला
हरीश रावत ने राज्य में लागू UCC से आधार की अनिवार्यता खत्म करने के केंद्र सरकार के फैसले को ‘उत्तराखंड विरोधी कदम’ बताया और इसकी कड़ी आलोचना की।
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मूल तर्क: यह फैसला राज्य की नागरिकता प्रणाली और नियंत्रण व्यवस्था को कमजोर करने वाला है।
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उद्देश्य कमजोर: उन्होंने कहा कि UCC लागू करते समय आधार पंजीकरण को बाहरी लोगों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए एक नियंत्रण व्यवस्था के रूप में रखा गया था। अब नियंत्रण हटाने से कोई भी व्यक्ति UCC में पंजीकरण कराकर उत्तराखंड की नागरिकता का दावा कर सकता है।
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परिणाम: रावत ने कहा कि यह कदम स्थानीय हितों और उत्तराखंड की मूल भावना के खिलाफ है। इससे सामाजिक ढांचा और राज्य की जनसंख्या संरचना प्रभावित हो सकती है।
😟 लिव-इन पंजीकरण और पारदर्शिता
रावत ने लिव-इन रिलेशनशिप में पंजीकरण प्रक्रिया को सरल करने के नाम पर किए गए बदलावों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि UCC को लेकर लोगों में जो भावना सामाजिक अनुशासन और नैतिक संतुलन बनाने की थी, वह ऐसे निर्णयों से कमजोर हो रही है। पारदर्शिता और सुरक्षा का सिस्टम शिथिल कर दिया गया है, जो उत्तराखंड की संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के लिए ठीक नहीं है।
🗳️ चुनावी पारदर्शिता पर टिप्पणी
बिहार के आरजेडी नेता सुनील सिंह के चुनाव आयोग को दी गई चेतावनी पर प्रतिक्रिया देते हुए, हरीश रावत ने कहा कि जनता के भीतर गहरा अविश्वास और संदेह घर कर गया है कि चुनावों को मैनिपुलेट किया जा रहा है।
“यह स्थिति बहुत खतरनाक है। लोकतंत्र में जब जनता का विश्वास हिल जाता है तो यह विध्वंसक परिणाम देता है।”
उन्होंने चुनाव आयोग और सरकार दोनों से पारदर्शिता बढ़ाने और लोगों का भरोसा कायम रखने की अपील की, ताकि लोकतंत्र के लिए हानिकारक ऐसे माहौल और बयानों को रोका जा सके।
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