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लालकुआं व्यापार मंडल चुनाव: उपाध्यक्ष पद के त्रिकोणीय मुकाबले में भुवन सिंह बिष्ट की मजबूत बढ़त; प्रकाश कुमार से कड़ी टक्कर

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लालकुआं: प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल लालकुआं इकाई के त्रिवार्षिक चुनाव का रण अब बेहद रोमांचक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। बाजार में चल रही चुनावी चर्चाओं और जमीनी समीकरणों के अनुसार, उपाध्यक्ष पद के लिए हो रहे त्रिकोणीय मुकाबले में भुवन सिंह बिष्ट ने अपनी दमदार जनसंपर्क शैली और स्पष्ट दृष्टिकोण के बल पर अपने दोनों प्रतिद्वंद्वियों पर एक मजबूत और मनोवैज्ञानिक बढ़त बना ली है। भुवन सिंह बिष्ट के पक्ष में उमड़े इस भारी व्यापारिक जनसमर्थन के बाद से विरोधी खेमों में बेचैनी साफ देखी जा सकती है।

छोटे-बड़े सभी व्यापारियों का मिला खुला और पूर्ण समर्थन

लालकुआं व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष पद की इस हाई-प्रोफाइल दौड़ में भुवन सिंह बिष्ट का पलड़ा अब सबसे भारी नजर आ रहा है। नगर के मुख्य बाजार से लेकर आस-पास के व्यापारिक क्षेत्रों के छोटे, मध्यम और बड़े, सभी श्रेणी के व्यापारियों ने एकजुट होकर भुवन सिंह बिष्ट को अपना खुला समर्थन देने का ऐलान किया है। सघन जनसंपर्क के दौरान दुकानदारों और प्रतिष्ठान स्वामियों ने बिष्ट पर अपना पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि वे एक ऐसे निष्पक्ष और कर्मठ प्रत्याशी हैं, जो बिना किसी भेदभाव के हर छोटे-बड़े व्यापारी के मान-सम्मान और उनके व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे।

रोमांचक हुआ मुकाबला: प्रकाश कुमार से सीधी भिड़ंत, किशन भट्ट को जोर लगाने की जरूरत

बाजार के ताजा समीकरणों पर नजर डालें तो लगातार बढ़ते जनसमर्थन के दम पर भुवन सिंह बिष्ट की स्थिति इस त्रिकोणीय मुकाबले में सबसे सुदृढ़ नजर आ रही है। हालांकि, चुनाव मैदान में उतरे एक अन्य मजबूत प्रत्याशी प्रकाश कुमार से उनकी टक्कर बेहद कड़ी और आमने-सामने की होती दिख रही है, जिससे मुकाबला अंत तक दिलचस्प बना रहेगा। वहीं दूसरी ओर, इस रेस के तीसरे उम्मीदवार किशन भट्ट चुनावी समीकरणों में फिलहाल पिछड़ते नजर आ रहे हैं और उन्हें मुकाबले में खुद को दोबारा मजबूती से स्थापित करने के लिए अब अपनी पूरी ताकत झोंकनी पड़ रही है।

भुवन सिंह बिष्ट के चुनावी कार्यालय से जुड़े रणनीतिकारों का कहना है कि व्यापारियों से मिल रहा यह अभूतपूर्व स्नेह और समर्थन इस बात का प्रमाण है कि बाजार की जनता बदलाव और एक सशक्त नेतृत्व के पक्ष में मन बना चुकी है। विरोधी खेमे अब इस एकतरफा ध्रुवीकरण को रोकने के लिए अपनी रणनीति बदलने में जुट गए हैं।

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