देहरादून (25 मार्च 2026): सरकारी परिसरों का उपयोग केवल प्रशासनिक कार्यों के लिए ही नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए भी किया जा सकता है, इसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल ने साबित कर दिया है।
1. शहद उत्पादन के आंकड़े (एक नज़र में)
पुष्प प्रदर्शनी के दौरान लगाए गए मेलीफेरा (Mellifera) प्रजाति के मधुमक्खी बक्सों से शानदार परिणाम मिले हैं:
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कुल उत्पादन: 101 किलोग्राम शहद।
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मुख्यमंत्री आवास: 60 किलोग्राम।
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लोक भवन परिसर: 41 किलोग्राम।
2. राज्यपाल का विजन: वैश्विक पहचान और आर्थिक सशक्तीकरण
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने खुद शहद निकालने की प्रक्रिया का अवलोकन किया और इस पहल के महत्व को रेखांकित किया:
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वैश्विक ब्रांड: उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखंड का शुद्ध और औषधीय शहद आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी धाक जमाएगा।
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अनुकूल परिस्थितियाँ: राज्य की जैव विविधता, औषधीय पौधे और जैविक खेती मधुमक्खी पालन के लिए देश में सबसे उपयुक्त हैं।
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पर्यटन और कृषि: उन्होंने सुझाव दिया कि पर्यटन प्रधान राज्य होने के नाते इसे ‘हनी टूरिज्म’ के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।
3. मुख्यमंत्री के निर्देश: बी-फ्रेंडली और बटरफ्लाई गार्डन
शहद उत्पादन की सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री धामी ने उद्यान विभाग को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं:
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इको-फ्रेंडली गार्डन: सीएम आवास और आसपास के क्षेत्रों में ‘बी-फ्रेंडली’ (मधुमक्खी अनुकूल), ‘बटरफ्लाई-फ्रेंडली’ (तितली अनुकूल) और ‘बर्ड-फ्रेंडली’ (पक्षी अनुकूल) गार्डन विकसित किए जाएंगे।
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था: सीएम ने जोर दिया कि पर्वतीय क्षेत्रों में औषधीय गुणों वाले शहद के उत्पादन से ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर मिलेंगे।
Snapshot: उत्तराखंड मधुमक्खी पालन पहल 2026
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| मधुमक्खी की प्रजाति | मेलीफेरा (Mellifera) |
| कुल उत्पादन | 101 किलो (शुद्ध शहद) |
| मार्गदर्शन | राज्यपाल ले. ज. गुरमीत सिंह और सीएम पुष्कर सिंह धामी |
| तकनीकी सहयोग | उद्यान विभाग और देवभूमि पर्वतीय ग्रामोद्योग विकास संस्थान |
| भविष्य का लक्ष्य | जैव विविधता संरक्षण और ग्रामीण स्वरोजगार |
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