उत्तराखंड ‘प्रवासी पंचायत’: सूने गांवों को आबाद करने की धामी सरकार की बड़ी पहल; 24 अप्रैल से टिहरी से होगा आगाज

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देहरादून (25 मार्च 2026): उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग अब सीधे प्रवासियों के द्वार तक पहुँचेगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शहरों में बस चुके प्रवासियों को उनके पैतृक गांवों की संभावनाओं से रूबरू कराना और उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना है।

1. अभियान का स्वरूप और समय-सीमा

  • शुभारंभ: 24 अप्रैल 2026 को टिहरी जिले से इस महत्वपूर्ण यात्रा की शुरुआत होगी।

  • लक्ष्य: नवंबर 2026 तक प्रदेश के सभी 13 जिलों में इन पंचायतों का सफल आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा।

  • रणनीति: जिला स्तर पर आयोजित होने वाले इन सम्मेलनों में विभागीय अधिकारी मौजूद रहेंगे, जो सरकारी योजनाओं (जैसे होमस्टे, बागवानी, डेयरी) की ऑन-स्पॉट जानकारी देंगे।

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2. ‘रिवर्स पलायन’ की सफलता: 6 हजार लोगों ने चुनी अपनी मिट्टी

आयोग के उपाध्यक्ष एस.एस. नेगी ने उत्साहजनक आंकड़े साझा किए हैं:

  • सफल वापसी: पिछले चार वर्षों में 6,000 से अधिक लोग शहरों की चकाचौंध छोड़कर वापस अपने गांव लौटे हैं।

  • सशक्त क्षेत्र: वापस लौटे लोग मुख्य रूप से होमस्टे, मधुमक्खी पालन, डेयरी और जैविक खेती के जरिए न केवल खुद आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि दूसरों को रोजगार भी दे रहे हैं।

  • रोल मॉडल: इन पंचायतों में इन्हीं ‘सफल प्रवासियों’ को वक्ता के रूप में बुलाया जाएगा, ताकि उनकी वास्तविक सफलता की कहानियां दूसरों के लिए प्रेरणा बनें।

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3. बुनियादी सुविधाओं पर सरकार का जोर

पलायन रोकने के लिए सरकार केवल स्वरोजगार पर ही नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता पर भी ध्यान दे रही है:

  • सड़क-बिजली-पानी: सरकार का दावा है कि गांवों में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया है ताकि प्रवासियों को मूलभूत सुविधाओं की कमी न खले।

  • स्थानीय बाजार: उत्पादों की बिक्री के लिए स्थानीय स्तर पर मंडियों और मार्केटिंग लिंक को सुदृढ़ किया जा रहा है।

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Snapshot: उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग की कार्ययोजना

विवरण जानकारी
अभियान का नाम प्रवासी पंचायत (Pravasi Panchayat)
प्रारंभ तिथि 24 अप्रैल 2026 (टिहरी)
मुख्य फोकस रिवर्स पलायन (Reverse Migration) और स्वरोजगार
सफलता का पैमाना 6,000+ सफल वापसी (पिछले 4 वर्षों में)
मार्गदर्शन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उपाध्यक्ष एस.एस. नेगी

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