राजू अनेजा,काशीपुर। सीधे-साधे लोगों को कथित तौर पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देकर मोटी रकम ऐंठने के गंभीर आरोपों पर न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। दस लाख रुपये की कथित रंगदारी मांगने और रकम न देने पर झूठे मुकदमे में फंसाने व जान से मारने की धमकी देने के मामले में अदालत ने आईटीआई कोतवाली पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करने के आदेश दिए हैं।
हेमपुर इस्माइल निवासी मुन्ना सरकार ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थनापत्र दाखिल कर पूरे मामले की शिकायत की थी। प्रार्थनापत्र में बताया गया कि उसकी पत्नी गीता, बेटे उदय सरकार और बेटी किरन सरकार के खिलाफ एक युवती ने घरेलू हिंसा से संबंधित प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
नोटिस मिला तो खुला मामला, युवती ने खुद को बताया उदय की पत्नी
प्रार्थी के अनुसार न्यायालय से नोटिस मिलने के बाद जब उसने मामले की जानकारी जुटाई तो कथित तौर पर पता चला कि उक्त युवती ने खुद को उदय सरकार की पत्नी बताते हुए उसके परिवार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसके बाद मामले की तह में जाने पर उसने युवती, उसके भाई और पिता निवासी जाफराबाद, शेरकोट, बिजनौर तथा एक अन्य महिला निवासी गदरपुर, हाल निवासी गढ़वाल सभा पर गंभीर आरोप लगाए।
झूठे केस का डर दिखाकर रकम मांगने का आरोप
मुन्ना सरकार ने अदालत में आरोप लगाया कि उक्त लोग सीधे-साधे लोगों, खासकर युवाओं को अपने जाल में फंसाकर पहले झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देते हैं और फिर ब्लैकमेल कर मोटी रकम की मांग करते हैं। आरोप है कि इसी तरह उससे भी दस लाख रुपये की मांग की गई।
रकम नहीं दी तो मुकदमा और जान से मारने की धमकी
प्रार्थी का आरोप है कि दस लाख रुपये देने से इनकार करने पर उसे झूठे मुकदमे में फंसाने के साथ ही जान से मारने की धमकी दी गई। मामले को लेकर उसने 8 मई को आईटीआई कोतवाली में तहरीर दी, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उसने 26 मई को एसएसपी और सीएम पोर्टल के माध्यम से शिकायत कर कार्रवाई की गुहार लगाई, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अदालत पहुंचा मामला तो पुलिस को जांच का आदेश
मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट राजेंद्र कुमार की अदालत में पहुंचा। अदालत ने शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन किया। इसके बाद न्यायालय ने आईटीआई कोतवाली पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विवेचना करने के आदेश जारी किए हैं।
अब अदालत के आदेश के बाद पुलिस की जांच से यह साफ होगा कि दस लाख रुपये की कथित मांग, धमकी और झूठे मुकदमे में फंसाने के आरोपों में कितनी सच्चाई है और पूरे मामले के पीछे वास्तविक कहानी क्या है।
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