हिमालय प्रहरी

माओवादी गतिविधियों के आरोपों में बंद हल्दुचौड़ निवासी गोपाल भट्ट, प्रशांत राही समेत चार आरोपी दोषमुक्त

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राजद्रोह गतिविधियों के आरोप से घिरे प्रशांत सांगलेकर उर्फ प्रशांत राही समेत चार लोगों को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने साक्ष्यों के सिद्ध नहीं होने पर बरी कर दिया है। इस दौरान प्रशांत राही ने न्यायालय में अपनी उपस्थिति वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से दी।

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता लक्ष्मी नारायण पटवा ने बताया कि 20 दिसंबर 2007 को नानकमत्ता थाने में एलआईयू निरीक्षक बीएल मधवाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी, साथ ही महाराष्ट्र निवासी प्रशांत सांगलीकर उर्फ प्रशांत राही को 23 दिसंबर 2007 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 29 फरवरी 2008 को टीचर कालोनी, काशीपुर निवासी दीपक पुत्र बसंत बल्लभ तथा हल्दूचौड, लालकुआं, नैनीताल निवासी गोपाल भट्ट पुत्र लक्ष्मी दत्त को माओवादी गतिविधियों में पकड़ा था। 

वर्ष 2008 में इस मामले में ट्रायल चला और 17 मार्च 2008 को आरोप पत्र दाखिल किया गया।

इस बीच 18 गवाह पेश किये गये। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायालय में प्रशांत राही व अन्य को बरी कर दिया है। वहीं बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता एडी मैसी ने बताया कि साक्ष्य से आरोप सिद्ध नहीं होने के कारण अदालत ने प्रशांत राही, चंद्रकला, दिनेश पांडे व गोपाल भट्ट को आरोपों से बरी कर दिया है। उन्होंने बताया कि प्रशांत राही किसी अन्य मामलें में महराष्ट्र जेल में बंद है। जिसके कारण उनकी उपस्थिति वीडियों कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई। वहीं अन्य सभी कोर्ट में मौजूद थे।

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