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नशे के खिलाफ गरजी कुमाऊं की शेरनी: बनभूलपुरा में मेडिकल स्टोर की आड़ में चल रहे नशे के गोरखधंधे का भंडाफोड़

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राजू अनेजा, नैनीताल।उत्तराखण्ड में नशे के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई शुरू हो चुकी है। सरकार की सख्त मंशा और पुलिस की आक्रामक रणनीति ने साफ कर दिया है कि अब नशे के सौदागरों के लिए कोई जगह नहीं बचने वाली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “ड्रग्स फ्री उत्तराखण्ड” विज़न को जमीनी स्तर पर उतारते हुए कुमाऊं पुलिस लगातार ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है।
इसी कड़ी में आईजी रिद्धिम अग्रवाल के नेतृत्व में चल रहे अभियान ने बीती रात हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में बड़ा खुलासा कर दिया। स्पेशल ऑपरेशन टास्क फोर्स (SOTF) और औषधि नियंत्रक विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर मेडिकल स्टोर की आड़ में चल रहे नशे के गोरखधंधे का पर्दाफाश कर दिया।

मेडिकल स्टोर बना नशे का अड्डा

कार्रवाई के दौरान बनभूलपुरा स्थित श्री श्याम मेडिकल स्टोर से संचालक हिमांशु वार्ष्णेय को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि मेडिकल स्टोर की आड़ में प्रतिबंधित और नियंत्रित दवाइयों का अवैध भंडारण और सप्लाई की जा रही थी।
छापेमारी में पुलिस ने भारी मात्रा में नशीली दवाइयां बरामद कीं, जिनमें—
20 Buprenorphine IP इंजेक्शन
113 Tramadol कैप्सूल
360 Alprazolam टैबलेट
बिना किसी वैध दस्तावेज के रखी गई थीं, जो सीधे तौर पर संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करती हैं।

कानून का चला डंडा, दुकान सीज

ड्रग इंस्पेक्टर ने मौके पर ही ड्रग एक्ट के नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई करते हुए मेडिकल स्टोर को सीज कर दिया। आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज़ी से आगे बढ़ाई जा रही है।
स्पष्ट संदेश: अब नहीं बख्शे जाएंगे नशे के सौदागर
कुमाऊं पुलिस ने साफ कर दिया है कि यह अभियान एक दिन की कार्रवाई नहीं, बल्कि लगातार चलने वाला मिशन है। हर जिले में निगरानी, खुफिया तंत्र की सक्रियता और लगातार छापेमारी के जरिए नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य तय किया गया है।
नशे के खिलाफ कुमाऊं की यह दहाड़ अब साफ संकेत दे रही है—
“या तो सुधर जाओ, या फिर कानून के शिकंजे के लिए तैयार रहो!”

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