हिमालय प्रहरी

पुणे हादसे में जान गंवाने वाले बिंदुखत्ता के मास्टरशेफ मनीष का पार्थिव शरीर पहुंचा घर; चित्रशिला घाट पर हुआ अंतिम संस्कार, ‘मां के लिए कूलर खरीदना’ रह गया आखिरी वादा

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लालकुआं: महाराष्ट्र के पुणे में हुए भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले बिंदुखत्ता निवासी 31 वर्षीय मास्टरशेफ मनीष जोशी का पार्थिव शरीर आज सुबह उनके पैतृक आवास पहुंचा। पोस्टमार्टम के बाद एम्बुलेंस से लगातार तीन दिन का लंबा सफर तय कर जब मनीष का शव घर के आंगन में उतरा, तो पूरे क्षेत्र में कोहराम मच गया। पांच बहनों के इकलौते अविवाहित भाई और बूढ़े माता-पिता के एकमात्र सहारे के अंतिम दर्शन के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा। दोपहर को रानीबाग स्थित पवित्र चित्रशिला घाट पर गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें भारी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण शामिल हुए।

ड्यूटी पूरी कर कमरे पर लौटते समय डंपर ने कुचला था

पारिवारिक व पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिंदुखत्ता के इंदिरा नगर प्रथम निवासी मनीष जोशी (31 वर्ष) पुत्र एल.डी. जोशी पुणे के एक नामचीन होटल में बतौर मास्टरशेफ कार्यरत थे।

  • चार दिन पहले हुआ था हादसा: चार दिन पूर्व रात के समय मनीष होटल में अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद मोटरसाइकिल से कमरे की तरफ लौट रहे थे।

  • अस्पताल में किया मृत घोषित: इसी दौरान रास्ते में एक तेज रफ्तार डंपर ने उन्हें बुरी तरह कुचल दिया। लहूलुहान अवस्था में उन्हें तुरंत पुणे के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुणे पुलिस द्वारा पंचनामा और पोस्टमार्टम की विधिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शव को एम्बुलेंस के जरिए उत्तराखंड भेजा गया था।

बहनों का इकलौता भाई था मनीष; बूढ़े माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल

मृतक मनीष पांच बहनों के बीच अकेले भाई थे और अभी अविवाहित थे। उनकी पांचों बहनों का विवाह हो चुका है और घर पर केवल उनके वृद्ध माता-पिता ही रहते हैं। घर के इकलौते चिराग और बुढ़ापे की लाठी के इस तरह असमय बुझ जाने से माता-पिता की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पूरे गांव के लोग इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे, लेकिन बूढ़े माता-पिता का क्रंदन देखकर हर आंख नम हो गई।

‘मां कूलर खरीद लेना, अगस्त में पहाड़ लौट आऊंगा…’ अधूरा रह गया सपना

परिजनों ने रोते हुए मनीष के साथ हुई आखिरी बातचीत को साझा किया, जो अब केवल याद बनकर रह गई है।

  • मां को भेजे थे पैसे: परिजनों के मुताबिक, महज एक सप्ताह पहले ही मनीष ने अपनी मां के बैंक खाते में कुछ पैसे ट्रांसफर किए थे।

  • कूलर खरीदने को कहा था: मनीष ने फोन पर मां से कहा था कि, “इस समय मैदानों में भीषण गर्मी चल रही है, इन पैसों से तुम अपने लिए एक अच्छा सा कूलर खरीद लो।”

  • उत्तराखंड लौटने की थी योजना: मनीष ने घर आने की उत्सुकता जताते हुए कहा था कि वह आगामी अगस्त महीने के बाद हमेशा के लिए उत्तराखंड वापस लौट आएगा, क्योंकि अब देवभूमि में भी कई बड़े-बड़े होटल खुल गए हैं और उसे अपने गृह राज्य में ही अच्छा काम मिल जाएगा।

परंतु होनी को कुछ और ही मंजूर था। अगस्त में जिस बेटे को हंसते हुए घर लौटकर आना था, आज उसका शव एम्बुलेंस में बंद होकर आया। बेटे के साथ ही इस गरीब परिवार के सुनहरे भविष्य के सारे सपने भी हमेशा के लिए टूटकर बिखर गए।

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