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काशीपुर में धड़ल्ले से चल रहा सूदखोरी का नेटवर्क अब जांच के घेरे में, आयोग तक पहुंची पीड़ितों की गुहार

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ब्लैंक चेक लेकर एनआई एक्ट के मुकदमों के जरिए दबाव बनाने के आरोप, राष्ट्रपति सचिवालय से लेकर मानवाधिकार आयोग तक पहुंची शिकायतें

 

राजू अनेजा, काशीपुर।तराई के प्रमुख व्यापारिक शहर काशीपुर में कथित सूदखोरी का नेटवर्क एक बार फिर चर्चा में है। शहर के कई लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग ऊंचे ब्याज पर रकम देने के बाद कर्जदारों से पहले ही हस्ताक्षर किए हुए ब्लैंक चेक ले लेते हैं और बाद में उन्हीं चेकों के आधार पर एनआई एक्ट के मुकदमे दर्ज कराकर दबाव बनाते हैं। शिकायतों की गूंज अब स्थानीय स्तर से निकलकर मानवाधिकार आयोग, मंडलायुक्त कार्यालय और राष्ट्रपति सचिवालय तक पहुंच गई है।

पीड़ितों का आरोप है कि आर्थिक मजबूरी में कर्ज लेने वाले लोग धीरे-धीरे ऐसे चक्रव्यूह में फंस जाते हैं, जहां मूल रकम चुकाने के बाद भी उनका पीछा नहीं छूटता। आरोप है कि कई मामलों में ब्लैंक चेक में मनमानी रकम भरकर अदालतों का सहारा लिया जाता है, जिससे कर्जदारों पर मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ जाता है।

 

सैकड़ों मुकदमों ने खड़े किए सवाल

 

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि शहर के कुछ लोगों द्वारा पिछले कुछ वर्षों में एनआई एक्ट के तहत बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। इनमें से दो व्यक्तियों के नाम विशेष रूप से चर्चा में बताए जा रहे हैं। आरोप है कि एक व्यक्ति द्वारा 350 से अधिक और दूसरे द्वारा 150 से अधिक मामले विभिन्न अदालतों में दर्ज कराए जा चुके हैं।

हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार बढ़ती शिकायतों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।

 

कर्जदारों को समझौते के लिए मजबूर करने का आरोप

पीड़ितों का कहना है कि मुकदमे दर्ज होने के बाद कई लोगों को जेल जाने या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर समझौते के लिए दबाव बनाया जाता है। आरोप है कि अदालत में अंतिम निर्णय आने से पहले ही अधिकांश मामलों में समझौते करा लिए जाते हैं।

कर्जदारों का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया और खर्च से बचने के लिए कई लोग मजबूरी में अपनी शर्तों पर समझौता करने को तैयार हो जाते हैं।

 

राष्ट्रपति सचिवालय ने भी लिया संज्ञान

अर्पित बत्रा, लक्ष्मण, संजय, शाहिद, इरफान, मुकीम, ज्योति कौर, दर्पण गुप्ता और अर्पण गुप्ता समेत कई लोगों ने राष्ट्रपति, मानवाधिकार आयोग, मंडलायुक्त और पुलिस अधिकारियों को शिकायत भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से भी शिकायत का संज्ञान लिया गया है और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है।

न्यायालयों में लंबित हैं हजारों मामले

जानकारों के अनुसार काशीपुर न्यायालय में वर्तमान समय में एनआई एक्ट के छह हजार से अधिक मामले लंबित हैं। इनमें बड़ी संख्या फाइनेंस कंपनियों और निजी उधार लेन-देन से जुड़े मामलों की बताई जाती है। ऐसे में लगातार बढ़ रही शिकायतों ने न्यायिक और प्रशासनिक तंत्र का ध्यान भी इस ओर खींचा है।

क्या कहता है कानून?

निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 के तहत जारी किया गया चेक यदि बैंक में धनराशि की कमी या अन्य वैध कारणों से बाउंस हो जाता है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है। दोष सिद्ध होने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान भी है। यही कारण है कि चेक बाउंस से जुड़े मामलों को अदालतें गंभीरता से लेती हैं।

जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा कर्ज वसूली के लिए कानून का दुरुपयोग किए जाने या नियमों के विपरीत कार्य करने की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

अब सभी की निगाहें जांच पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल सूदखोरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानून के कथित दुरुपयोग और आर्थिक शोषण के बड़े नेटवर्क का भी खुलासा कर सकता है।

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