
गैरसैंण (चमोली)। उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी सड़क सुविधा न होने का खामियाजा ग्रामीणों को जान गंवाकर चुकाना पड़ रहा है। चमोली जिले के गैरसैंण विकासखंड अंतर्गत कुनीगाड़ क्षेत्र के गोगनाणी गांव (कोठा ग्राम पंचायत) से एक बेहद मार्मिक तस्वीर सामने आई है। यहां 61 वर्षीय बीमार बुजुर्ग बलवंत सिंह को इलाज के लिए 4 किलोमीटर दूर सड़क तक पहुंचाने के लिए गांव की महिलाओं ने डोली का सहारा लिया। गांव में पुरुषों और युवाओं की कमी के चलते 12 से अधिक महिलाओं ने खुद कंधा देकर मरीज को कोठा बैंड पहुंचाया, लेकिन चौखुटिया और फिर बेस अस्पताल अल्मोड़ा ले जाने के बाद भी बुजुर्ग की जान नहीं बचाई जा सकी।
एक साल में 3 ग्रामीणों की गई जान, वन भूमि स्वीकृति में अटकी है सड़क निर्माण की फाइल
मृतक के भाई कैप्टन विक्रम सिंह ने बताया कि सड़क न होने और समय पर इलाज न मिलने के कारण बीते एक वर्ष में गांव के तीन लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 400 की आबादी वाले गोगनाणी, दमदड़ और तिमिलपानी गांवों को जोड़ने के लिए लोनिवि द्वारा दो मार्ग प्रस्तावित किए गए हैं, लेकिन वन विभाग की एनओसी (स्वीकृति) न मिलने के कारण फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं। लोनिवि गैरसैंण के अधिशासी अभियंता आशुतोष कुमार और केदारनाथ वन प्रभाग के उप वन संरक्षक रजत सुमन ने बताया कि संयुक्त निरीक्षण के बाद लगी आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही दोबारा सर्वे कर कानूनी अड़चनों को दूर किया जाएगा।