उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव भले ही दूर हों, लेकिन विधायकों में अस्तित्व की लड़ाई अभी से शुरू हो गई है। हैरानी की बात यह है कि यह लड़ाई सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नहीं, बल्कि सत्ताधारी भाजपा के दो पड़ोसी विधायकों—धर्मपुर के विनोद चमोली और रायपुर के उमेश शर्मा काऊ—के बीच देखने को मिल रही है।
राजधानी देहरादून में धर्मपुर और रायपुर विधानसभा को जोड़ने वाले ‘हरे पुल’ के निर्माण को लेकर यह तनातनी उत्पन्न हुई है।
🛑 विवाद की जड़: हरे पुल का निर्माण
| पक्ष | विवरण |
| धर्मपुर विधायक (विनोद चमोली) | उन्होंने अपनी विधानसभा (दीपनगर) से रायपुर विधानसभा (केदारपुरम) को जोड़ने वाले जीर्ण-शीर्ण हो चुके हरे पुल के निर्माण का प्रस्ताव पास कराया। |
| रायपुर विधायक (उमेश शर्मा काऊ) | उन्होंने मौके पर जाकर पुल का निर्माण कार्य रुकवा दिया। |
🗣️ पार्षदों और विधायकों का पक्ष
स्थानीय पार्षद दिनेश प्रसाद सती का आरोप
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विधायक काऊ का यह कदम उनके ‘विकास कार्यों के लिए जाने जाने’ वाली छवि के विपरीत है।
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यह पुल लंबे समय से स्थानीय जनता की मांग थी और पिछले तीन-चार माह से इसका निर्माण चल रहा था।
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उन्हें हैरानी है कि विधायक ने अचानक काम क्यों रुकवाया, जबकि उन्हें निर्माण की पूरी जानकारी पहले ही दी जा चुकी होगी।
धर्मपुर विधायक विनोद चमोली का रुख
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उन्हें नहीं लगता कि विधायक उमेश काऊ पुल निर्माण के खिलाफ हैं, बल्कि उन्हें कुछ संदेह रहा होगा, जिस पर उन्हें जानकारी नहीं मिली होगी।
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उन्होंने आश्वासन दिया कि उनके (काऊ) संदेह का समाधान कर दिया जाएगा।
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यह पुल जनता की मांग पर उनकी विधानसभा (दीपनगर) के अंतर्गत स्वीकृत हुआ है।
रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ का पक्ष
रायपुर विधायक ने मीडिया से खुलकर बात करने से इनकार कर दिया, लेकिन फ़ोन पर उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा:
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“मैं विकास के लिए विनाश नहीं होने दूँगा।”
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यह पुल 2013-14 में रायपुर विधानसभा के लिए ₹1.90 करोड़ में स्वीकृत हुआ था, लेकिन आज इसका निर्माण ₹3.5 करोड़ खर्च करके किया जा रहा है।
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उन्हें आपत्ति है कि उनकी विधानसभा (केदारपुरम) से जोड़ने के बावजूद उन्हें क्यों नहीं पूछा गया?
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उन्होंने दावा किया कि निर्माण एजेंसी द्वारा गंदा पानी मंदिर में छोड़ा गया है और PWD द्वारा बनाए गए पुश्तों से नुकसान हुआ है।
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पुल से आगे सिर्फ 12 फीट का रास्ता है, इसलिए इतना बड़ा पुल बनाने की जरूरत नहीं है।
🛠️ निर्माण एजेंसी का स्पष्टीकरण
कार्यदायी एजेंसी देहरादून निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता नीरज त्रिपाठी ने बताया:
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पुल का विवरण: यह दीपनगर से केदारपुरम को जोड़ने वाला डेढ़ लेन हरे मोटर पुल है, जिसकी लागत ₹3.50 करोड़ है।
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स्वीकृति: यह पुल धर्मपुर विधानसभा के अंतर्गत स्वीकृत हुआ है।
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पुराने पुल का रिकॉर्ड: विभागीय रिकॉर्ड में पूर्व में बने लोहे के पुल का कोई जिक्र नहीं है।
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आपत्ति: निर्माण के लिए चार दुकानें खाली कराई गई हैं और चार अन्य हटाई जा रही हैं, जिसमें किसी ने कोई आपत्ति नहीं की है।
इस विवाद के चलते फिलहाल पुल का निर्माण कार्य रुका हुआ है, और दोनों भाजपा विधायकों के बीच की यह तनातनी देहरादून की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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