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दुर्भाग्य! पहाड़ चढ़ने को रोडवेज नहीं, लंबी दूरी की ट्रेन भी नदारद, काशीपुर का यह कैसा विकास ?

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राजू अनेजा, काशीपुर।औद्योगिक नगरी के तमगे से नवाज़े गए काशीपुर में विकास के दावे जमीन पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। हालात यह हैं कि न पहाड़ चढ़ने के लिए रोडवेज बस उपलब्ध है और न ही लंबी दूरी की कोई ट्रेन। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर काशीपुर का यह कैसा विकास, जहां से न पहाड़ का रास्ता खुला है और न ही देश के बड़े शहरों तक सीधी पहुंच?
काशीपुर रोडवेज डिपो से नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ जैसे किसी भी पहाड़ी जिले के लिए एक भी बस का संचालन नहीं हो रहा। यात्रियों को मजबूरी में हल्द्वानी या रामनगर जाकर सफर शुरू करना पड़ता है। पहले से ट्रेन सुविधाओं की कमी झेल रहे काशीपुरवासियों के लिए यह स्थिति दोहरी मार साबित हो रही है।

बसों की हालत ऐसी कि चालक भी पहाड़ जाने से कतराएं

काशीपुर रोडवेज डिपो की बसों की हालत इतनी जर्जर है कि चालक इन बसों को पहाड़ पर ले जाने से कतराते हैं। लंबे समय से पहाड़ के लिए यहां से एक भी रोडवेज बस नहीं चलाई गई। यात्रियों का कहना है कि अब सीधे काशीपुर से नैनीताल या अल्मोड़ा जाना सपना बनकर रह गया है।

एक बस भी नियमित नहीं, रोजमर्रा के यात्री परेशान
सुबह 5:30 बजे जसपुर से वाया काशीपुर हल्द्वानी जाने वाली बस ही यात्रियों का एकमात्र सहारा है, लेकिन आरोप है कि इस बस को भी नियमित न चलाकर कई बार दिल्ली या हरिद्वार रूट पर भेज दिया जाता है। इससे नौकरीपेशा, छात्र और मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

डिपो के बाहर तालाब, अंदर बदइंतजामी

बरसात के बाद काशीपुर रोडवेज डिपो के बाहर बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर गया है, जिससे यात्रियों का डिपो में प्रवेश तक मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि डिपो के बुनियादी सुधार को लेकर वर्षों से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

पुरानी बसों में जान जोखिम में डालकर सफर
काशीपुर बस डिपो में कुल 50 बसें हैं, जिनमें 15 अनुबंधित और 35 उत्तराखंड परिवहन निगम की हैं। इनमें से अधिकांश बसें 2016 मॉडल की हैं, जो या तो सात लाख किलोमीटर चल चुकी हैं या सात साल से अधिक पुरानी हो चुकी हैं। इन बसों से सफर करना यात्रियों के लिए जान जोखिम में डालने जैसा बताया जा रहा है।

प्रबंधन के दावे, हकीकत में इंतजार

महाप्रबंधक संचालन क्रांति सिंह का कहना है कि सुबह 5 बजे जसपुर से वाया काशीपुर, रुद्रपुर होते हुए हल्द्वानी जाने वाली अनुबंधित बस को नियमित रूप से चलाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
वहीं सहायक महाप्रबंधक राजेंद्र कुमार आर्य ने बताया कि नई बसों की मांग को लेकर मुख्यालय को पत्र भेजा गया है, लेकिन फिलहाल पहाड़ों के लिए बस संचालन का कोई आदेश नहीं है।

सवाल वही—विकास कहां है?
जहां एक ओर सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं काशीपुर की हकीकत यह है कि न ट्रेन है, न रोडवेज। पहाड़ों और बड़े शहरों से कटता काशीपुर आज यह सवाल पूछ रहा है-अगर सफर की बुनियादी सुविधा भी नहीं, तो यह कैसा विकास?

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