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काशीपुर के ‘50 तारे’ अंतरराष्ट्रीय मंच पर: उर्वशी की पहल से बदलेगी बेसहारा बच्चों की तकदीर

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राजू अनेजा,काशीपुर। सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बीच काशीपुर से शुरू हुई एक पहल आज उम्मीद की बड़ी कहानी बन चुकी है। “आने वाले 50 तारे” अभियान के जरिए बेसहारा और जरूरतमंद बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है। उर्वशी दत्त बाली की इस सोच ने अब स्थानीय दायरे को पार कर अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बना ली है।

 

सिर्फ पढ़ाई नहीं, हुनर पर फोकस

 

इस पहल की खास बात यह है कि बच्चों को केवल किताबी शिक्षा तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि उन्हें जीवनोपयोगी कौशल भी सिखाए जा रहे हैं। उद्देश्य साफ है—बच्चे जब शिक्षा पूरी करें, तो उनके पास केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि ऐसा हुनर भी हो जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और आत्मविश्वास के साथ समाज में अपनी जगह बना सकें।

 

विभिन्न स्किल्स में दी जा रही ट्रेनिंग

 

कार्यक्रम के तहत बच्चों को सिलाई, बेकिंग, होटल सर्विस, फोटोग्राफी, इंग्लिश स्पीकिंग, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट, हेयर ड्रेसिंग, पार्लर वर्क, प्लंबिंग, बिजली कार्य और डिजिटल स्किल्स जैसी कई विधाओं में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण पूरी तरह प्रैक्टिकल है, जिससे बच्चे सीखने के साथ-साथ उसे अपने जीवन में उतार सकें।

 

व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान

 

बच्चों को केवल तकनीकी कौशल ही नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व को भी निखारा जा रहा है। विदेश में लंबे समय तक कार्य कर चुके शांतनु चिकारा बच्चों को कम्युनिकेशन स्किल्स और आत्मविश्वास बढ़ाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। इससे बच्चे न केवल काम सीख रहे हैं, बल्कि खुद को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करना भी सीख रहे हैं।

ऑक्सफोर्ड से मिला अंतरराष्ट्रीय साथ

 

इस पहल को उस समय बड़ी पहचान मिली, जब University of Oxford (यूके) के डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन से जुड़े स्कॉलर एवं यश फाउंडेशन इंडिया के प्रोजेक्ट डायरेक्टर Tejas Dongre इस अभियान से जुड़ गए। उनके सहयोग से अब यह पहल अंतरराष्ट्रीय मार्गदर्शन में आगे बढ़ रही है, जो काशीपुर के लिए गर्व की बात है।

 

हर माह होंगे विशेष प्रशिक्षण सत्र

 

 

इस कार्यक्रम के तहत काशीपुर में 50 बच्चों के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। हर माह विशेषज्ञ और शिक्षक मिलकर बच्चों के सर्वांगीण विकास पर काम करेंगे। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद बच्चों को प्रमाण पत्र भी दिए जाएंगे, जिससे उनके रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

 

शिक्षा विभाग और संस्थानों का सहयोग

 

नेताजी सुभाष चंद्र बोस राजकीय इंटर कॉलेज, पीरूमदारा के खंड शिक्षा अधिकारी श्री साहू और प्रधानाचार्य ए.के. पांडे इस पहल में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके सहयोग से सरकारी विद्यालयों के बच्चों को भी इस अभियान से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
गुरुकुल स्कूल प्रबंधन का अहम योगदान
गुरुकुल स्कूल के चेयरमैन डॉ. नीरज कपूर, डायरेक्टर डॉ. वसुधा कपूर और प्रधानाचार्या मीनल बधवार भी इस पहल में लगातार सहयोग कर रहे हैं। उनका मानना है कि समाज से मिला सहयोग शिक्षा के माध्यम से लौटाना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

 

जनता का मिल रहा भरपूर समर्थन

 

इस अभियान को काशीपुर की जनता का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। स्किल ट्रेनिंग से जुड़ी हर जरूरत में लोग आगे आकर सहयोग कर रहे हैं, जिससे बच्चों को बेहतर संसाधन उपलब्ध हो पा रहे हैं।

 

उम्मीद से आत्मनिर्भरता की ओर

 

यह पहल अब एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी है। ‘आने वाले 50 तारे’ केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक मजबूत संकल्प है—बेसहारा बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने का, उन्हें सम्मानजनक जीवन देने का और उनके सपनों को साकार करने का। आने वाले समय में यही बच्चे अपने हुनर और आत्मविश्वास के दम पर समाज में नई पहचान बनाएंगे।

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