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उत्तराखंड : छात्राओं के कपड़े फाड़ दे रहे बंदर, हमले से खौफ में लड़कियां

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तनाव, नशे की लत के अलावा और भी कई ऐसी मनोस्थितियां हैं जिनसे उबरने के लिए काउंसलिंग की बातें आपने बहुत सुनी होंगी। लेकिन, पिथौरागढ़ शहर में एक स्कूल ऐसा भी है जहां बंदरों के खौफ से छात्राओं को बाहर निकालने के लिए उनकी काउंसलिंग करनी पड़ रही है।

एक साल के भीतर 468 छात्राओं की काउंसलिंग की जा चुकी है।

जंगलों में तेजी से बढ़ रहे मानवीय हस्तक्षेप और शहरों में आसानी से मिल जा रहे भोजन के कारण बंदरों ने देशभर के शहरों में तेजी से अपनी आमद बढ़ाई है। पिथौरागढ़ शहर भी इससे अछूता नहीं है। शहर के एक छोर पर बसे गंगोत्री गर्ल्स बालिका इंटर कॉलेज में तो कटखने बंदरों ने छात्राओं की नींद ही उड़ा दी है। बंदरों का एक पूरा झुंड क्षेत्र में सक्रिय है। आए दिन बंदर छात्राओं पर हमले कर रहे हैं। स्कूल से छात्राओं को सीधे अस्पताल ले जाना पड़ रहा है। प्रवक्ता शहजादी गौसिया ने बताया कि बंदरों के हमले से चार छात्राएं बुरी तरह घायल हो चुकी हैं। जिन्हें अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आ गई थी।

कपड़े तक फाड़ दे रहे बंदर

प्रवक्ता शहजादी गौसिया बताती हैं, बंदरों ने स्कूल परिसर में ही डेरा बना लिया है। शिक्षिकाओं और छात्राओं के हाथ में कोई सामान देखकर बंदर और खूंखार हो जाते हैं। बंदर इतने बेखौफ हैं कि शरीर तो नोंच ही रहे हैं कपड़े तक फाड़ दे रहे हैं। पांच दिन पूर्व ही बंदरों के झुंड ने कक्षा से बाहर आ रहीं दसवीं की छात्राओं पर हमला बोल दिया। दो छात्राओं की स्कूल ड्रेस तक फाड़ दी। बाद में डरी, सहमी छात्राओं की काउंसलिंग की गई।

टीचर दे रहीं पहरा
शिक्षिकाओं को बंदरों के कारण पहरेदार की भूमिका निभानी पड़ रही है। दरअसल विद्यालय में छात्राओं को मध्यान्ह भोजन परोसा जाता है, लेकिन बंदर उन्हें यह खाने नहीं देते। यहां तक एमडीएम की रसोई के भीतर जाकर बंदर खाद्य सामग्री लेकर भाग जाते हैं। ऐसे में छात्राएं भोजन कर सकें इसके लिए शिक्षिकाएं हाथ में डंडा लेकर पहरा देती हैं।

वन विभाग की मदद भी ली, नहीं बदले हालात

स्कूल प्रबंधन ने छात्राओं की सुरक्षा को लेकर वन विभाग से भी मदद मांगी। विभाग ने स्कूल में पिंजरा लगाया, एक-दो बंदर फंसे भी। बाद में विभाग ने उन्हें दूर जंगल में छोड़ दिया, लेकिन कुछ समय बाद बंदर फिर से आ गए।

जीजीआईसी की प्रधानाचार्य कमला आर्या ने बताया कि बंदरों का झुंड अधिकतर समय विद्यालय परिसर में ही रहता है। आए दिन बंदर छात्राओं पर हमला करते हैं। कई दफा बंदरों के हमले से छात्राएं घबरा जाती हैं। तब शिक्षिकाएं, छात्राओं की काउंसलिंग करती हैं।

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