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वैश्विक पटल पर चमका उत्तराखंड: रूस के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में एमआईईटी कुमाऊं ने बढ़ाया भारत का मान; 17 देशों के दिग्गजों ने की शिरकत

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हल्द्वानी: शिक्षा और तकनीकी शोध के क्षेत्र में नैनीताल जनपद के हल्द्वानी स्थित एमआईईटी (MIET) कुमाऊं संस्थान ने वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। रूस की अस्त्राखान तातीश्चेव स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय “यूरेशियन नेटवर्क ऑफ यूनिवर्सिटीज सम्मेलन” में एमआईईटी कुमाऊं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस वैश्विक महामंथन में दुनिया भर के 17 देशों के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लेकर भविष्य की शिक्षा नीति पर विस्तृत चर्चा की।

वाइस चेयरमैन पुनीत अग्रवाल और प्लेसमेंट निदेशक आकांक्षा अग्रवाल का विशेष सम्मान

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे एमआईईटी कुमाऊं के वाइस चेयरमैन पुनीत अग्रवाल और प्लेसमेंट निदेशक आकांक्षा अग्रवाल का सम्मेलन की आयोजन समिति द्वारा भव्य स्वागत और विशेष सम्मान किया गया। वैश्विक मंच पर भारत की ओर से दी गई उनकी प्रस्तुति और सुझावों को सम्मेलन में बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी माना गया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. इगोर अलेक्सेयेव ने बताया कि इस महामंथन में भारत के अलावा तुर्कमेनिस्तान, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, ईरान और बेलारूस समेत 17 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

स्टूडेंट एक्सचेंज और ज्वाइंट रिसर्च प्रोग्राम पर रहेगा फोकस

सम्मेलन के दौरान अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के स्तर को सुधारने, संयुक्त शोध परियोजनाओं (Joint Research Projects), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आपसी तालमेल तथा छात्र-छात्राओं के लिए वैश्विक स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई। इस अवसर पर एमआईईटी कुमाऊं के वाइस चेयरमैन पुनीत अग्रवाल ने वैश्विक शिक्षा को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से परे जाकर काम करने पर जोर दिया।

पुनीत अग्रवाल ने कहा:

“वर्तमान समय में विद्यार्थियों के चहुंमुखी विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद आवश्यक है। विभिन्न देशों के बीच स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम (छात्र विनिमय कार्यक्रम), संयुक्त शोध और नई तकनीकों का आदान-प्रदान होना चाहिए, ताकि हमारे युवाओं को वैश्विक स्तर पर सीधे अवसर मिल सकें।”

सम्मेलन में एमआईईटी कुमाऊं की इस दूरदर्शी सोच और सक्रिय भागीदारी की वैश्विक प्रतिनिधियों द्वारा विशेष सराहना की गई, जो उत्तराखंड के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

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