किसान आंदोलन के विरोध में अखिल भारतीय किसान महासभा का तहसील में प्रदर्शन राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

 

  • प्रदेश अध्यक्ष आनन्द सिंह नेगी : तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा
  • नैनीताल जिला संयोजक बहादुर सिंह जंगी  :  सरकार हठधर्मिता छोड़े
  • देशव्यापी आह्वान पर लालकुआं तहसील में प्रदर्शन कर ज्ञापन

किसान आंदोलन के 6 फरवरी के देशव्यापी आह्वान पर अखिल भारतीय किसान महासभा (AIKM) द्वारा किसान विरोधी-जन विरोधी तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने, स्वामीनाथन कमेटी रिपोर्ट अनुसार लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर खरीद की गारंटी करने का कानून बनाने व किसान आंदोलन का दमन और उत्पीड़न पर रोक लगाते हुए आंदोलनरत किसानों पर थोपे गए मुकदमे वापस लेने की तीन सूत्रीय मांगों को लेकर तहसील लालकुआं के प्रांगण में प्रदर्शन कर तहसील लालकुआं के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति महोदय को ज्ञापन भेजा गया।

इस अवसर पर तहसील प्रांगण में संक्षिप्त सभा में बोलते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनन्द सिंह नेगी ने कहा कि, “किसानों की जमीन छीनकर अंबानी-अडानी सरीखे काॅरपोरेट घरानों के हवाले करने वाले मोदी सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का ऐतिहासिक देशव्यापी आंदोलन जारी है. इस अभूतपूर्व आंदोलन को आम जनता का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है. ये विनाशकारी कृषि कानून न केवल किसानों व किसानी को तबाह कर देंगे, बल्कि आम जनता को दाने-दाने का मोहताज बना देंगे – खासकर असंगठित मजदूरों, मजदूरों की आगामी पीढ़ियों और गरीब अवाम को खाद्य सुरक्षा से भी वंचित कर देंगे क्योंकि खाने की वस्तुओं को बाजार और जमाखोरी के हवाले कर दिया जायेगा, राशन व पीडीएस प्रणाली समाप्त कर दी जाएगी.”

उन्होंने कहा कि, “मोदी सरकार की नोटबंदी से शुरू होकर लाॅकडाउन तक रोजगार का भारी पैमाने पर विनाश हो गया है. देश आज रिकाॅर्ड-तोड़ बेरोजगारी और साथ ही कमरतोड़ महंगाई के नीचे कराह रहा है.
मोदी सरकार द्वारा पेश बजट भी किसान मजदूर विरोधी है। किसानों और आम मेहनतकश जनता का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है. ये कृषि कानून फांसी का फंदा है जिससे किसानों और आम जनता को खुद को मुक्त करना है; इसी मुक्ति और नए कंपनी राज के खिलाफ किसानों ने इस दिशा में एक ऐतिहासिक आंदोलन छेड़ दिया है यह देश को नयी दिशा देगा।”

किसान महासभा के नैनीताल जिला संयोजक बहादुर सिंह जंगी ने कहा कि, “मोदी सरकार हठधर्मिता छोड़े और देश के किसानों की बात सुनकर तीनों कृषि कानूनों को वापस ले। अन्यथा फैलते जा रहे किसान आंदोलन के चलते उनको अपने कदम वापस खींचने पर मजबूर होना ही पड़ेगा।”

ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम में भागीदारी करने वालों में वरिष्ठ किसान नेता भुवन जोशी,नैन सिंह कोरंगा, विमला रौथाण, किशन बघरी, गोविंद सिंह जीना, स्वरूप सिंह दानू, माले जिला सचिव डॉ कैलाश पाण्डेय, ललित मटियाली, बिशन दत्त जोशी, त्रिलोक सिंह दानू, दौलत सिंह कार्की, आनन्द सिंह दानू आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।

 

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