नए जिले बनाने से पहले पुराने जिलों में किए जाएंगे विकास कार्य – मुख्यमंत्री

रानीखेत : मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहां की उनकी प्राथमिकता प्रदेश के अंतिम छोर के गांव के विकास की है। उन्होंने कहा कि जितना बजट नए जिलों को बनाने में लगेगा उतने बजट में पुराने जिलों का चहुंमुखी विकास हो जाएगा।
सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को वन विश्राम गृह में पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से कहा की पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीणों को रोजगार देने व जंगलों को आग से बचाने के लिए सरकार एक नई योजना पर कार्य कर रही है। जिसके तहत जैव ईंधन बनाने के लिए ग्रामीणों से 3.50 रुपये प्रति किलो की दर से पिरूल खरीदा जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वह सरकार की योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं। ताकि सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति को मिल सके।पिरूल प्रोजेक्ट पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीणों से साढ़े तीन किलो के हिसाब से पिरूल खरीदा जाएगा। जिससे एक व्यक्ति की प्रतिमाह 10 हजार रुपये की कमाई तो की हो ही जाएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा की पिरूल प्रोजेक्ट को आम आदमी तक पहुचाकर लोगो को जागरूक करें।
इस दौरान नए जिलों के गठन की मांग पर सीएम ने कहा कि नए जिले बनाने में करीब 200 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। सरकार फिलहाल नए जिले बनाने के बजाय पुराने जिलों को संवारने का प्रयास कर रहे हैं। धन लूट जाएगा तो नए जिले भी बन जाएंगे।

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