हिमालय प्रहरी

बिंदुखत्ता वासियों को अतिक्रमणकारी चिन्हित करने वाला पत्र सोशल मीडिया में वायरल होने पर क्षेत्र में आक्रोश, बिंदुखत्ता के खिलाफ किसी भी षड्यंत्र के विरुद्ध आंदोलन करेगी भाकपा माले

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राजू अनेजा,लालकुआ।बिंदुखत्ता वासियों को अतिक्रमणकारी चिन्हित करने वाला पत्र सोशल मीडिया में वायरल होने पर क्षेत्र वासियों  में जबरदस्त आक्रोश पनपता दिखाई दे रहा है एक तरफ बिंदु खत्ता के खिलाफ किसी भी षड्यंत्र के विरुद्ध ग्रामीण एकजुट दिखाई दे रहे हैं वही राजस्व गांव का सपना दिखाकर वोट ऐंठने वाली भाजपा सरकार के खिलाफ भाकपा माले ने भी जन् आंदोलन करने का मन बना लिया है। पार्टी के वक्ताओं का कहना है कि“बिंदुखत्ता को सत्ताधारी भाजपा के सांसद और विधायक ने चुनाव में राजस्व गांव का दर्जा दिलवाने का वायदा किया था। लेकिन अब इसे अतिक्रमण के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। भाजपा का वादा राजस्व गांव का था, लेकिन इरादा अतिक्रमण के नाम पर हटाने का है। यह सरासर वायदा खिलाफी है यह बिल्कुल नहीं चलने दिया जायेगा। इसके विरुद्ध बिंदुखत्ता की जनता के पक्ष में और भाजपा की उत्तराखंड सरकार की इस कार्यवाही के विरुद्ध भाकपा माले जन अभियान संचालित करते हुए आन्दोलन करेगी।” भाकपा माले के नैनीताल जिला सचिव डा कैलाश पाण्डेय ने यह बात प्रेस बयान के माध्यम से कही।

उन्होंने कहा कि, “उत्तराखण्ड में अतिक्रमण हटाने और लैंड जेहाद के नाम पर उन्माद का माहौल भाजपा सरकार और संघ के अनुषांगिक संगठनों द्वारा बनाया जा रहा है और अतिक्रमण के नाम पर खत्तों, वन ग्रामों से लोगों को बेदखल करने की तैयारी नज़र आ रही है, अतिक्रमण हटाने के नाम पर भय और सांप्रदायिक विभाजन का खेल उत्तराखंड की भाजपा सरकार खेल रही है। जिस तरह से वन ग्रामों,खत्तों में रामनगर के पुछडी, नई बस्ती, कालुसिद्ध से लेकर गुर्जर खत्तों से लोगों को हटाने के नोटिस दिये गए हैं और हटाया जा रहा है, और अब बिंदुखत्ता को भी इस दायरे में शामिल कर दिया गया है यह बहुत बड़ी आबादी को बेघर करने की धामी सरकार की योजना का विस्तार है। पुष्कर सिंह धामी की सरकार लैंड जेहाद का हव्वा खड़ा करके सांप्रदायिक विभाजन पैदा कर रही है, जबकि वास्तव में इस अभियान की चपेट में सिर्फ अल्पसंख्यक ही नहीं बल्कि गरीब, भूमिहीन, दलित सभी लोग आ रहे हैं। कुल मिलाकर सांप्रदायिक आवरण में यह गरीबों को उजाड़ने और बेघर करने का कार्यक्रम है।”

अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष बहादुर सिंह जंगी ने कहा कि, “वन संरक्षण अधिनियम 1980 में संशोधन का विधेयक संसद में लंबित है, जिसमें वनों को निजी हाथों में देने का प्रावधान है। ऐसा प्रतीत होता है कि सांप्रदायिक आवरण में यह बड़े कॉर्पोरेट घरानों के लिए वनों को खाली कराने का भी खेल है। असल में धामी सरकार अतिक्रमण हटाओ के नाम पर गरीबों भूमिहीनों को उजाड़ने का काम कर रही है। इस गरीब विरोधी, कॉर्पोरेट हितैषी अतिक्रमण हटाओ अभियान के विरुद्ध अभियान संगठित एवं संचालित करते हुए सड़कों पर उतरने की जरूरत है जिसके लिए जनता की व्यापक एकता का निर्माण किया जाएगा।”

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