
देहरादून। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के हालिया हल्द्वानी दौरे के बाद उत्तराखंड कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी और खींचतान की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत खेमे की कथित नाराजगी, वरिष्ठ नेताओं की जनसभा से गैरमौजूदगी और दिग्गज कांग्रेस नेता गोविंद सिंह कुंजवाल के भतीजे दिनेश कुंजवाल के यूकेडी (UKD) में शामिल होने जैसे घटनाक्रमों ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि संगठन में अपेक्षित तवज्जो न मिलने से एक धड़ा नाराज है, जिससे चुनाव पूर्व कांग्रेस को झटके लग सकते हैं।
पूर्व स्पीकर के भतीजे यूकेडी में शामिल; हरीश रावत, मयूर महर और प्रीतम सिंह की दूरी से उठे सवाल
जागेश्वर क्षेत्र के प्रभावशाली कुंजवाल परिवार से जुड़े दिनेश कुंजवाल का कांग्रेस छोड़ यूकेडी का दामन थामना स्थानीय समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। वहीं, खरगे की जनसभा में हरीश रावत और उनके करीबी विधायक मयूर महर की अनुपस्थिति को यद्यपि पार्टी प्रवक्ताओं ने अस्वस्थता बताया है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे संगठन नेतृत्व से मतभेदों के रूप में देख रहे हैं। वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह की रैली से दूरी ने भी इन चर्चाओं को हवा दी है। हालांकि, नेताओं की ओर से औपचारिक तौर पर किसी मतभेद की पुष्टि नहीं की गई है।
छह विधायकों के भाजपा के संपर्क में होने के दावे, 2027 के चुनावी गणित पर पड़ सकता है असर
राजनीतिक हलकों और भाजपा सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस के छह मौजूदा विधायक भाजपा के संपर्क में हैं, जबकि कुछ असंतुष्ट नेता यूकेडी का रुख कर सकते हैं। यद्यपि इन दावों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन 2027 के चुनाव से पहले अपने कुनबे और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना कांग्रेस नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। आने वाले दिनों में यदि कोई औपचारिक दल-बदल होता है, तो यह प्रदेश की भावी राजनीति का रुख तय करेगा।
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