हाईकोर्ट में अनूप अग्रवाल की याचिका खारिज, विधायक समेत समर्थकों के साथ पहुंचने पर कड़ी फटकार

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राजू अनेजा, काशीपुर/नैनीताल। माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अनूप अग्रवाल द्वारा दायर याचिका को सख्ती के साथ खारिज कर दिया। याचिका में याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ दर्ज पांच मुकदमों को लेकर विभिन्न प्रकार की राहत की मांग की थी, जिसमें जांच को सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी को ट्रांसफर करने, मुकदमों को अवैध घोषित करने और सभी एफआईआर को निरस्त (क्वैश) करने की प्रमुख मांग शामिल थी।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने याचिका में उठाए गए बिंदुओं को भ्रमात्मक, अंतर्विरोधी और स्पष्टता से रहित पाया। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की याचिका में राहत देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता, जिसके चलते इसे खारिज कर दिया गया।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित मामलों में से दो में पुलिस विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर चुकी है, जबकि अन्य मामलों की जांच अभी जारी है। ऐसे में हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं बनता।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने याचिकाकर्ता के आचरण पर भी कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने न्यायालय से प्राप्त प्रोटेक्शन का दुरुपयोग किया और 15-20 समर्थकों के साथ, जिनमें 10-12 अधिवक्ता और एक वर्तमान विधायक भी शामिल थे, विवेचक के समक्ष बयान दर्ज कराने पहुंचे।
न्यायालय ने इसे विवेचना पर दबाव बनाने और जांच प्रक्रिया में व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास मानते हुए कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति को विवेचना में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है और इस प्रकार की गतिविधियां पूरी तरह अनुचित हैं।
हाईकोर्ट के इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक दबाव बनाने की कोशिशों पर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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