विधानसभा अपडेट: वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाने के लिए सरकार गंभीर; बिंदुखत्ता के मालिकाना हक में ’75 साल’ की कानूनी बाधा

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गैरसैंण (12 मार्च 2026): उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में बुधवार को सदन की कार्यवाही के दौरान वन भूमि पर बसे गांवों का मुद्दा छाया रहा। संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने स्पष्ट किया कि सरकार दशकों से काबिज लोगों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है, हालांकि कुछ तकनीकी और कानूनी प्रावधानों के कारण प्रक्रिया में विलंब हो रहा है।

1. बिंदुखत्ता प्रकरण: 2 साल की कमी से अटका हक

मंत्री सुबोध उनियाल ने बिंदुखत्ता का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि वनाधिकार कानून के तहत मालिकाना हक देने में एक बड़ी बाधा सामने आई थी:

  • कानूनी शर्त: वनाधिकार कानून के अनुसार, वन भूमि पर मालिकाना हक तभी मिल सकता है जब निवासी को वहां रहते हुए वर्ष 2005 तक 75 वर्ष पूर्ण हो गए हों।

  • अड़चन: वर्ष 2005 में बिंदुखत्ता के निवासियों के वहां निवास के 73 वर्ष ही पूर्ण हो रहे थे। मात्र 2 साल की इस तकनीकी कमी के कारण उस समय सरकार चाहकर भी मालिकाना हक नहीं दे पाई।

2. सरकार की पहल: उच्चस्तरीय समिति का गठन

सरकार ने सदन को आश्वस्त किया कि समाधान के प्रयास निरंतर जारी हैं:

  • विशेष समिति: सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है जो विभिन्न प्रकार की विवादित भूमियों पर बसे लोगों के अधिकारों का अध्ययन कर रही है।

  • बैठकें: इस समिति की अब तक 5 से अधिक बैठकें हो चुकी हैं और कई गांवों को पहले ही राजस्व ग्राम का दर्जा दिया जा चुका है।

3. विपक्ष का हमला: “पीढ़ियां बीत गईं, हक कब मिलेगा?”

कांग्रेस ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया:

  • यशपाल आर्य (नेता प्रतिपक्ष): उन्होंने कहा कि वन भूमि पर पीढ़ी दर पीढ़ी रहने वाले लोगों को भूमिधरी अधिकार न मिलने से वे मूलभूत सुविधाओं और योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।

  • प्रीतम सिंह (कांग्रेस विधायक): उन्होंने ऋषिकेश के बापूग्राम की घटना का हवाला देते हुए सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए।

  • भुवन कापड़ी व काजी निजामुद्दीन: इन विधायकों ने भी भूमिधरी अधिकारों के विषय पर सरकार को घेरते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की।


Snapshot: वन ग्राम से राजस्व ग्राम का मुद्दा

प्रमुख बिंदु विवरण
मुख्य मांग वन भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना (भूमिधरी) अधिकार देना।
बड़ी बाधा वनाधिकार कानून की ’75 वर्ष निवास’ वाली शर्त (2005 की समय सीमा)।
सरकारी पक्ष सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में समिति कर रही है समीक्षा।
विपक्ष का रुख सरकार पर ढुलमुल रवैये और संवेदनहीनता का आरोप।

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