अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना: 17 लाख मरीजों को मिला जीवनदान, अब इन सात गंभीर बीमारियों का होगा फ्री इलाज
देहरादून: उत्तराखंड सरकार की ‘अटल आयुष्मान योजना’ राज्य के नागरिकों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बनकर उभरी है। अब तक प्रदेश के 56.95 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिससे उन्हें देश और प्रदेश के सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है।
📊 योजना की अब तक की उपलब्धियां
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लाभार्थी: 17 लाख से अधिक मरीजों का निश्शुल्क उपचार।
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कार्ड वितरण: 56.95 लाख नागरिकों के पास आयुष्मान कार्ड उपलब्ध।
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कवरेज: प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का निश्शुल्क स्वास्थ्य बीमा।
💰 गंभीर बीमारियों के उपचार पर हुआ खर्च (एक नजर में)
योजना के तहत सबसे महंगे और जटिल ऑपरेशनों का खर्च सरकार वहन कर रही है:
| स्पेशिलिटी (रोग) | कुल मामले (संख्या) | कुल खर्च (करोड़ रुपये में) |
| कार्डियोलॉजी (हृदय रोग) | 39,642 | ₹345.14 |
| ओंकोलॉजी (कैंसर इलाज) | 79,653 | ₹221.34 |
| डायलिसिस (किडनी) | 2,67,397 | ₹177.61 |
| न्यूरो सर्जरी | 11,820 | ₹59.05 |
| नी-रिप्लेसमेंट (घुटना) | 2,453 | ₹21.32 |
| किडनी ट्रांसप्लांट | 25 | ₹0.54 |
👴 बुजुर्गों के लिए विशेष लाभ (70+ आयु वर्ग)
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुसार, योजना में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त लाभ जोड़े गए हैं:
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अतिरिक्त कवर: जिन परिवारों में 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग हैं, उन्हें परिवार के ₹5 लाख के कवर के अलावा ₹5 लाख का अलग व्यक्तिगत बीमा दिया जा रहा है।
📢 शिकायत और समाधान
यदि कोई सूचीबद्ध (Empaneled) अस्पताल आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीज से पैसों की मांग करता है, तो:
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शिकायत: सीधे आयुष्मान प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
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कार्रवाई: दोषी पाए जाने पर अस्पताल के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई और उसे योजना से बाहर (De-empanel) करने का प्रावधान है।

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