हिमालय प्रहरी

उत्तराखंड में बसपा ने कसी चुनावी कमर: मायावती ने लखनऊ में की समीक्षा बैठक; अनिल कुमार चौधरी बने नए प्रदेश अध्यक्ष, मोहित आनंद को मिली कमान

खबर शेयर करें -

देहरादून/लखनऊ: उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भी राज्य में अपनी राजनैतिक जमीन को मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। लखनऊ में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने उत्तराखंड संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए नई टीम की घोषणा की है। पार्टी ने सांगठनिक ढांचे को धार देने के लिए अनिल कुमार चौधरी को उत्तराखंड बसपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है, जबकि अब तक अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे मोहित आनंद को पदोन्नत कर प्रदेश प्रभारी का महत्वपूर्ण जिम्मा सौंपा गया है।

साफ और मजबूत छवि वाले उम्मीदवारों पर दांव लगाएगी बसपा: मायावती

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को आयोजित इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में बसपा सुप्रीमो मायावती ने उत्तराखंड के प्रमुख पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों और प्रभारियों के साथ जमीनी गतिविधियों और चुनावी तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक को संबोधित करते हुए मायावती ने दोटूक शब्दों में कहा:

“उत्तर प्रदेश के चुनावी फॉर्मूले की तर्ज पर उत्तराखंड में भी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन में पूरी सावधानी और सतर्कता बरती जाए। पार्टी इस बार केवल और केवल मजबूत जनाधार तथा साफ-सुथरी छवि वाले निष्ठावान प्रत्याशियों को ही चुनावी मैदान में उतारेगी। किसी भी दागी या पैराशूट उम्मीदवार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेताओं और कार्यकर्ताओं को कड़े निर्देश दिए कि वे केवल बड़े कार्यक्रमों तक सीमित न रहें, बल्कि तत्काल प्रभाव से बूथ स्तर तक संगठन को पुनर्जीवित कर सक्रिय करें और पार्टी की मूल जनकल्याणकारी नीतियों को आम जनता तक पहुंचाएं।

“राज्य गठन के बाद भी उपेक्षित रहा उत्तराखंड, हमारी सरकार ने किए थे बड़े काम”

उत्तराखंड की वर्तमान और पूर्ववर्ती सरकारों को आड़े हाथों लेते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि पृथक उत्तराखंड राज्य बनने के इतने वर्षों बाद भी प्रदेश के सीमांत, पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों का जैसा अपेक्षित और संतुलित विकास होना चाहिए था, वैसा बिल्कुल नहीं हो पाया है। मायावती ने दावा किया कि अविभाजित उत्तर प्रदेश में जब बसपा की सरकार थी, तब राज्य के लोगों को राहत देने, बुनियादी ढांचे को सुधारने और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ऐतिहासिक व महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे वर्तमान सरकार की विफलताओं और जनता के बुनियादी मुद्दों (जैसे रोजगार, पलायन और स्वास्थ्य) को प्रमुखता से उठाकर सड़कों पर संघर्ष करें।

दलित, आदिवासी और उपेक्षित वर्गों को एकजुट करने की रणनीति पर महामंथन

इस रणनीतिक बैठक में उत्तराखंड के भीतर दलित, आदिवासी (एसटी), पिछड़े (ओबीसी) और अल्पसंख्यक समाज के बीच पार्टी के जनाधार को वापस पाने और संगठन को नए सिरे से मजबूत करने पर गहन चर्चा हुई। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से ही सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय और जनहित की राजनीति में विश्वास करती है।

बैठक के अंत में नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार चौधरी और नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी मोहित आनंद ने केंद्रीय नेतृत्व का आभार जताते हुए संकल्प लिया कि वे जल्द ही पूरे प्रदेश का दौरा कर नई कार्यकारिणी का गठन करेंगे और उपेक्षित व शोषित वर्गों को एकजुट कर आगामी चुनाव में बसपा को राज्य में एक मजबूत राजनैतिक विकल्प के रूप में स्थापित करेंगे।

Exit mobile version