
राजू अनेजा, लालकुआं।बिंदुखत्ता के राजस्व ग्राम मुद्दे पर मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक अब नए विवाद में घिरती जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब वनाधिकार संगठन और पूर्व सैनिक संगठन के प्रतिनिधिमंडल को औपचारिक रूप से बुलाया गया था, तो फिर उन्हें अधिकारियों के साथ हुई अहम चर्चा से बाहर क्यों रखा गया?
बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित किए जाने की मांग अब आंदोलन की राह पर बढ़ती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री के साथ हुई अहम बैठक के दौरान स्थानीय विधायक मोहन सिंह बिष्ट पर शिष्टमंडल के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगा है। इस घटना के बाद वनाधिकार संगठन और पूर्व सैनिक संगठन ने कड़ा रुख अपनाते हुए विधायक के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया।
संयुक्त बैठक में सर्वसम्मति से पारित हुआ प्रस्ताव
आज आयोजित संयुक्त बैठक में दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों ने विधायक के आचरण पर गहरी नाराजगी जताई। सर्वसम्मति से पारित निंदा प्रस्ताव में कहा गया कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में इस तरह का व्यवहार जनभावनाओं का अपमान है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
प्रतिनिधिमंडल को चर्चा से बाहर रखने पर भी नाराजगी
बैठक में इस बात को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई कि मुख्यमंत्री द्वारा आमंत्रित किए जाने के बावजूद प्रतिनिधिमंडल को अधिकारियों के साथ हुई अहम चर्चा में शामिल नहीं किया गया। संगठनों ने इसे जनता और जनप्रतिनिधियों की सीधी उपेक्षा करार दिया।
डिफॉरेस्टेशन प्रस्ताव पर भी उठा विवाद
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा बिंदुखत्ता की पत्रावली को डिफॉरेस्टेशन के लिए सुप्रीम कोर्ट भेजे जाने के फैसले पर भी संगठनों ने कड़ा विरोध जताया। उनका कहना है कि यह कदम वनाधिकार कानून की भावना के विपरीत है और इसे सीधे तौर पर वादाखिलाफी माना जाना चाहिए।
‘जन-जन की सरकार’ के दावे पर सवाल
संगठनों ने आरोप लगाया कि प्रदेशभर में “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” जैसे कार्यक्रम चलाए गए, लेकिन बिंदुखत्ता को इससे पूरी तरह दूर रखा गया। इससे स्थानीय लोगों में सरकार के प्रति गहरा आक्रोश पनप रहा है।
अब आर-पार की तैयारी: तीन दिन का अनशन ऐलान
बढ़ते आक्रोश के बीच संगठनों ने 4, 5 और 6 मई 2026 को तीन दिवसीय क्रमिक अनशन का ऐलान किया है। पहले दो दिन सरकार, प्रशासन और सभी राजनीतिक दलों को खुली बहस के लिए बुलाया जाएगा, जबकि तीसरे दिन विशाल जनसभा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
बिंदुखत्ता में उबाल, आंदोलन की जमीन तैयार
बैठक की अध्यक्षता उमेश भट्ट और संचालन नंदन बोरा ने किया। बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक और स्थानीय लोग शामिल हुए। जिस तरह से अब निंदा प्रस्ताव से लेकर अनशन तक की घोषणा हुई है, उससे साफ है कि बिंदुखत्ता में आंदोलन की जमीन तैयार हो चुकी है।
कुल मिलाकर, बिंदुखत्ता का मुद्दा अब सिर्फ मांग नहीं, बल्कि आंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है—और आने वाले दिनों में यह सियासत का बड़ा केंद्र बन सकता है।
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