उत्तराखंड शिक्षा विभाग की ‘दोहरी नीति’: कक्षा 1 में दाखिले की उम्र पर बढ़ा विवाद; हल्द्वानी के 4000 बच्चों के भविष्य पर संकट, अभिभावक और स्कूल संचालक असमंजस में
उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में आयु गणना (Age Calculation) को लेकर जारी ‘दोहरी नीति’ ने प्रदेश के हजारों अभिभावकों और निजी स्कूल संचालकों की नींद उड़ा दी है। नया सत्र शुरू होने के बाद नियमों में हुए इस बदलाव से विशेषकर हल्द्वानी जैसे ‘एजुकेशन हब’ में दाखिला ले चुके हजारों बच्चों के भविष्य पर तलवार लटक गई है।
यहाँ इस विवाद और विभाग के विरोधाभासी आदेशों का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:
हल्द्वानी (11 अप्रैल 2026): शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के ‘एकरूपता’ के दावों के उलट, जमीनी स्तर पर शिक्षा विभाग के दो अलग-अलग नियमों ने अव्यवस्था फैला दी है। सरकारी और निजी स्कूलों के लिए उम्र के अलग-अलग मानकों ने सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
1. क्या है पूरा विवाद? (एक राज्य, दो नियम)
शिक्षा विभाग ने कक्षा 1 में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष अनिवार्य की है, लेकिन इसकी गणना की अंतिम तिथि को लेकर विरोधाभास है:
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सरकारी स्कूलों के लिए: आयु गणना की अंतिम तिथि 30 जून रखी गई है (यानी 30 जून तक बच्चा 6 साल का होना चाहिए)।
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निजी स्कूलों के लिए: विभाग अब 1 अप्रैल की समय सीमा पर अड़ गया है।
2. हल्द्वानी पर बड़ा असर: 4000 बच्चों का क्या होगा?
कुमाऊं के प्रमुख शिक्षा केंद्र हल्द्वानी में इस बदलाव का असर सबसे ज्यादा दिख रहा है:
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दाखिले हो चुके: सत्र शुरू होने के 8 दिन बीत चुके हैं और अधिकांश निजी स्कूलों ने 30 जून की समय सीमा मानकर प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली है।
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संकट: नियम बदलने से अकेले हल्द्वानी के 300 स्कूलों में पढ़ रहे करीब 4000 बच्चे अपात्र (Ineligible) घोषित हो सकते हैं।
3. RTE पंजीकरण में फंसा पेंच
शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश के लिए पोर्टल पर 30 जून की सेटिंग की गई थी।
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पंजीकरण: 24 मार्च से अप्रैल प्रथम सप्ताह तक इसी आधार पर हजारों आवेदन हुए।
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दिक्कत: अब यदि 1 अप्रैल का नियम सख्ती से लागू हुआ, तो पोर्टल पर हुए आवेदन और वास्तविक प्रवेशों में बड़ा अंतर आ जाएगा, जिससे गरीब बच्चों का शिक्षा का अधिकार छिन सकता है।
4. अधिकारियों का तर्क बनाम स्कूल एसोसिएशन का विरोध
इस मुद्दे पर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं:
“शिक्षा विभाग दोहरी नीति अपना रहा है। सरकारी और निजी स्कूलों के लिए अलग-अलग नियम नहीं होने चाहिए। 30 जून के पत्र के आधार पर ही स्कूलों ने प्रवेश किए हैं, अब अचानक बदलाव से अराजकता फैलेगी।”
— कैलाश भगत, अध्यक्ष, पब्लिक स्कूल एसोसिएशन
“NEP (नई शिक्षा नीति) में कक्षा 1 के लिए 6 वर्ष की आयु स्पष्ट है। सरकारी स्कूलों में कुछ समस्याओं के चलते 30 जून की छूट दी गई है, लेकिन निजी स्कूलों के लिए 1 अप्रैल की तिथि ही प्रभावी रहेगी। विभागीय सचिव ने भी इसे स्पष्ट किया है।”
— कंचन देवराड़ी, प्रभारी निदेशक, माध्यमिक शिक्षा
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