हल्द्वानी: बनभूलपुरा में बेदखली के डर से ‘रिफंड’ मांग रहे बिजली उपभोक्ता; बकाया न चुकाने पर अटक सकता है PM आवास का लाभ
हल्द्वानी: रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद प्रभावित क्षेत्र के लोगों में हलचल तेज हो गई है। इस बीच एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है—ऊर्जा निगम द्वारा की गई बकाया वसूली की रकम को अब लोग वापस (Refund) मांग रहे हैं। वहीं, प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिल जमा न करना भविष्य में पुनर्वास की योजनाओं में भारी पड़ सकता है।
ऊर्जा निगम के पास पहुंचे ‘अजीब’ फोन कॉल
निगम के अवर अभियंताओं (JE) को पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई फोन आए हैं, जिनमें उपभोक्ताओं ने हाल ही में जमा की गई बिजली के बिल की रकम वापस मांगी है।
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अचंभित अधिकारी: यूपीसीएस प्रबंधन इस मांग से हैरान है। करीब 5-6 लोगों ने, जिनसे लगभग ₹1 लाख की वसूली हुई थी, ऑनलाइन जमा रकम वापस करने की डिमांड की है।
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वजह: अतिक्रमण की जद में आ रहे परिवारों को लगता है कि यदि जगह खाली करनी ही है, तो वे सरकारी बिलों का भुगतान क्यों करें।
बकाया दबाया तो नहीं मिलेगी PM आवास की NOC
रेलवे भूमि क्षेत्र के लोग यदि बिजली और पानी का बकाया दबाने की योजना बना रहे हैं, तो यह उनके लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि:
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अनिवार्य नो-ड्यूज (No Dues): यदि भविष्य में प्रभावितों को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत घर आवंटित किए जाते हैं, तो उसके लिए जल संस्थान और ऊर्जा निगम की ‘NOC’ अनिवार्य होगी।
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लाभ से वंचित: बिना बकाया चुकाए किसी भी सरकारी योजना या पुनर्वास प्रक्रिया का लाभ मिलना लगभग असंभव होगा।
ऊर्जा निगम की अपील और सख्ती
अधिशासी अभियंता प्रदीप कुमार ने स्पष्ट किया है कि बकाया वसूली का अभियान रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा:
“उपभोक्ताओं ने बिजली का उपयोग किया है, तो उन्हें बिल चुकाना ही होगा। अतिक्रमण क्षेत्र के बकायेदारों से भी रकम वसूली जा रही है। हम उपभोक्ताओं से अपील करते हैं कि वे सहयोग करें और कानून का पालन करें।”
प्रमुख बिंदु: एक नज़र में (Quick Highlights)
| विषय | वर्तमान स्थिति / निर्देश |
| सुप्रीम कोर्ट का रुख | क्षेत्र खाली करने के स्पष्ट संकेत, सुनवाई जारी रहेगी। |
| उपभोक्ताओं की मांग | जमा किए गए बिल की रकम वापस (Refund) मांगी जा रही है। |
| प्रशासनिक चेतावनी | बकाया न देने पर ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ का लाभ अटक सकता है। |
| जरूरी दस्तावेज | पुनर्वास के लिए जल संस्थान और बिजली विभाग की NOC अनिवार्य होगी। |
| वसूली अभियान | ऊर्जा निगम द्वारा कनेक्शन काटने और मौके पर वसूली की कार्रवाई जारी। |
निष्कर्ष: बनभूलपुरा के निवासियों के लिए वर्तमान स्थिति दोहरी चुनौती वाली है। एक ओर छत छिनने का डर है, तो दूसरी ओर भविष्य में सरकारी मदद पाने के लिए पुराने बिलों का बोझ चुकाना उनकी विवशता बन गई है।

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