हरदोई: “प्रहलाद नगरी” के रूप में पुनर्जीवित हुई सांस्कृतिक पहचान; होली की भव्य शोभा यात्रा ने रचा नया इतिहास

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हरदोई | 20 फरवरी, 2026: जनपद हरदोई की सांस्कृतिक अस्मिता आज एक नए गौरवमयी युग में प्रवेश कर रही है। सामाजिक-धार्मिक संस्था प्रहलाद नगरी जन कल्याण समिति के अथक प्रयासों से हरदोई की पौराणिक पहचान “प्रहलाद नगरी” के रूप में अब जन-जन की आवाज बन चुकी है। होली के पावन पर्व पर आयोजित भक्त प्रहलाद जी की प्रथम भव्य शोभा यात्रा इस सांस्कृतिक जागरण का मील का पत्थर साबित हुई है।


🌸 शोभा यात्रा: श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम

होली के अवसर पर समिति द्वारा आयोजित इस ऐतिहासिक शोभा यात्रा ने पूरे नगर को भक्तिमय कर दिया:

  • भक्तिमय वातावरण: नगर की प्रमुख सड़कों और गलियों में “प्रहलाद नगरी” के उद्घोष, धर्म ध्वजाओं और पुष्प वर्षा के बीच श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

  • सांस्कृतिक उद्घोष: यह यात्रा केवल एक आयोजन नहीं थी, बल्कि हरदोई को उसकी प्राचीन पहचान वापस दिलाने की एक सशक्त घोषणा थी।

  • जन भागीदारी: जगह-जगह हुए स्वागत और भक्ति गीतों की गूंज ने साबित कर दिया कि अब यह नाम केवल औपचारिक संबोधन नहीं, बल्कि जनभावना बन चुका है।

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🛡️ औपचारिकता से जन-आंदोलन तक का सफर

विगत वर्षों में “प्रहलाद नगरी” नाम केवल विशिष्ट अतिथियों के स्वागत या भाषणों तक सीमित था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है:

  • अभिन्न पहचान: अब हरदोई के चौराहों, सामाजिक चर्चाओं और यहाँ तक कि बच्चों की बातचीत में भी “प्रहलाद नगरी” का नाम सहजता से शामिल है।

  • नेतृत्व का विजन: इस सांस्कृतिक नव-चेतना के मुख्य सूत्रधार समिति के अध्यक्ष शिवम द्विवेदी हैं। उनके मार्गदर्शन में समिति ने न केवल आयोजनों को सफल बनाया, बल्कि जन-जागरण को प्राथमिकता देकर इस विचार को घर-घर पहुँचाया।

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📊 हरदोई की नई पहचान: एक नजर में

बिंदु विवरण
संस्था प्रहलाद नगरी जन कल्याण समिति।
मुख्य श्रेय शिवम द्विवेदी (अध्यक्ष) एवं उनकी टीम।
मुख्य आयोजन भक्त प्रहलाद जी की प्रथम भव्य शोभा यात्रा (होली)।
प्रभाव स्थानीय से राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पहचान की ओर अग्रसर।

🏛️ गौरवशाली भविष्य की नींव

समिति के इन प्रयासों ने हरदोई की पौराणिक और ऐतिहासिक परंपराओं को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ने का कार्य किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस गति से इस अभियान को जन समर्थन मिल रहा है, वह दिन दूर नहीं जब हरदोई प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय मानचित्र पर “प्रहलाद नगरी” के रूप में अपनी विशिष्ट गरिमा स्थापित करेगा।

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निष्कर्ष: आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का यह अद्भुत संगम हरदोई की आत्मा को पुनः जागृत कर रहा है। यह अभियान न केवल जिले के अतीत को सम्मान दे रहा है, बल्कि भविष्य के लिए एक सशक्त सांस्कृतिक आधार भी तैयार कर रहा है।

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