हैट्रिक की तैयारी में भाजपा ! कामकाज की कसौटी पर मंत्री-विधायक, फिसले तो कटेगा टिकट

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राजू अनेजा, देहरादून।आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी मोड में प्रवेश कर लिया है। लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने के लक्ष्य के साथ भाजपा ने इस बार टिकट वितरण को लेकर कड़े और स्पष्ट पैमाने तय कर दिए हैं। पार्टी नेतृत्व ने साफ संकेत दे दिया है कि मंत्री हो या विधायक—पद नहीं, प्रदर्शन ही टिकट की गारंटी होगा।

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों में आंतरिक सर्वे कराने जा रहा है। इन सर्वे में मंत्रियों और विधायकों की लोकप्रियता, छवि, संगठन से तालमेल और जनता से जुड़ाव को परखा जाएगा। साथ ही यह भी आकलन होगा कि मंत्री बनने के बाद संबंधित विधानसभा क्षेत्र को कितना वास्तविक लाभ मिला।

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सीट बदलने की राजनीति पर सख्ती

पार्टी संगठन ने इस बार एक और अहम फैसला लिया है। जो मंत्री या विधायक जिस सीट से चुनाव जीतकर आया है, अगला चुनाव भी उसी सीट से लड़ेगा।

पिछले चुनावों में कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जब विधायक या मंत्री अपनी पुरानी सीट छोड़कर नई सीट पर चुनाव मैदान में उतर गए। संगठन का मानना है कि इससे एक ओर पुरानी सीट पर मतदाताओं के बीच गलत संदेश जाता है, वहीं नई सीट पर पहले से तैयारी कर रहे दावेदारों में असंतोष पैदा होता है। इसे पार्टी दोहरा नुकसान मान रही है।

पैमाने हुए और सख्त

लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की चुनौती को देखते हुए भाजपा ने परफॉर्मेंस आधारित टिकट नीति को और मजबूती दी है। संगठन के स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि सिर्फ चेहरे, समीकरण या सिफारिश के दम पर टिकट मिलना अब मुश्किल होगा।

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विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य, जनता के बीच उपस्थिति, संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रियता और जनसुनवाई जैसे बिंदुओं पर रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा।

विधायकों के लिए भी चेतावनी

यह सख्ती केवल मंत्रियों तक सीमित नहीं है। विधायकों के लिए भी आगामी चुनाव बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है। नए प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन ने वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों को संदेश दे दिया है कि किसी भी स्तर पर ढिलाई या सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आने वाले एक वर्ष में विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में जनता से संवाद बढ़ाने, संगठन को मजबूत करने और विकास कार्यों को गति देने के निर्देश दिए गए हैं।

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हैट्रिक की राह आसान नहीं

भाजपा नेतृत्व भले ही हैट्रिक की तैयारी में जुटा हो, लेकिन संगठन जानता है कि जनता के बीच मजबूत पकड़ के बिना यह लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा। यही वजह है कि इस बार चुनावी रणनीति में कामकाज की कसौटी और जनता की राय को निर्णायक बनाया जा रहा है।

 

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